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घर में इस तरह करना चाहिए कुबेर की पूजा, कभी नहीं होगी धन की कमी

सैकड़ो हजारों साल पहले पुलत्स्य ऋषि के सिर पर विपदा आ गई जहां वो रहते थे वहां अकाल पड़ गया।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2017, 06:13 PM IST

कुबेर राजाओं के अधिपति तथा धन के स्वामी हैं। वे देवताओं के धनाध्यक्ष के रूप मे जाने जाते हैं। इसलिए इन्हें राजाधिराज भी कहा जाता है। गंधमादन पर्वत पर स्थित संपत्ति का चौथा भाग इनके नियंत्रण में है। उसमें से सोलहवां भाग ही मानवों को दिया गया है। कुबेर नौ-निधियों के अधिपति जो हैं। ये निधियां हैं- पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील, और वर्चस। ऐसा कहते हैं कि इनमें से एक निधि भी अनंत वैभव देने वाली है। कुबेर देवाधिदेव शिव के मित्र हैं।

इसलिए जो इनकी उपासना करता है, उसकी आपत्तियों के समय रक्षा भी होती है। इसलिए सभी यज्ञ-यागादि, पूजा-उत्सवों तथा दस दिक्पालों के रूप में भी कुबेर की पूजा होती है। ये उत्तराधिपति हैं यानी उत्तर दिशा के अधिपति हैं।सैकड़ो हजारों साल पहले पुलत्स्य ऋषि के सिर पर विपदा आ गई जहां वो रहते थे वहां अकाल पड़ गया। उस समय ऋषि जानते थे कि श्रीगणेश ही उन्हें कोई ऐसा रास्ता बता सकते हैं। जिससे वो इस समस्या से बाहर निकल सकें। इसलिए उन्होंने श्रीगणेश की आराधना करना शुरू कि वर्षों की तपस्या के बाद श्रीगणेश ने प्रसन्न होकर उन्हें कहा कि वे कुबेर यंत्र की स्थापना करें और कुबेर के 9 रूपों में से किसी भी एक रूप की आराधना करें। उन्हें इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

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