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ऐसे लोगों की अचानक पलटती है किस्मत, ये है ज्योतिषीय मान्यताएं

सूर्य और चंद्र को छोडकर अन्य ग्रह दो-दो राशियों के स्‍वामी हैं।

Danik Bhaskar | Nov 29, 2017, 03:07 PM IST

कुंडली पर इंसान का भाग्य निर्भर करता है। इसीलिए कुंडली के किस भाव में कौन सा ग्रह बैठा है। ये बात जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करती है। मान्यता है कि केंद्र और त्रिकोण के स्वामी हमेशा अच्छा फल देते हैं। यदि कोई ग्रह त्रिकोण का स्‍वामी हो जाए तो उसे योगकारक सूर्य और चंद्र को छोडकर अन्य ग्रह दो-दो राशियों के स्‍वामी हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह एक साथ केंद्र और ग्रह कहते हैं। योगकारक ग्रह उत्‍तम फल देते हैं और कुंडली की संभावना को भी बढाते हैं। उदाहरण के लिए कुंभ लग्‍न की कुंडली में शुक्र चतुर्थ भाव और नवम भाव का स्‍वामी रहेगा। चतुर्थ भाव केंद्र स्‍थान होता है और नवम त्रिकोण स्‍थान होता है। अत: शुक्र कुंडली में एक साथ केंद्र और त्रिकोण का स्‍वामी होने से योगकारक ग्रह बन जाएगा। अत: ऐसी कुंडली में यदि शुक्र पर कोई नकारात्मक प्रभाव न हो तो वह शुभ फल ही देगा।

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