--Advertisement--

इस साधारण से गुरुमंत्र ने एक आम लड़के को बना दिया आइंस्टीन

जब विश्व विख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन बचपन में पढ़ने में कमजोर थे।

Danik Bhaskar | Nov 22, 2017, 02:47 PM IST
Motivational stories Motivational stories

जब विश्व विख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन बचपन में पढ़ने में कमजोर थे। उनकी कमजोरी पर उनके साथी उनका मजाक उड़ाया करते थे। एक दिन उन्होंने अध्यापक से गंभीरतापूर्वक पूछा कि क्या मैं किसी तरह का विद्वान बन सकता हूं? अध्यापक ने कहा – दिलचस्पी, लगन और एकाग्रता से निरंतर अभ्यास द्वारा कोई भी महान बन सकता है। ये उपदेश मानो आइंस्टीन के लिए गुरुमंत्र था। उसने इस गुरुमंत्र को मन में बैठाया और दृढ़संकल्प के साथ अध्ययन में जुट गया। पूरे विश्व को यह पता है कि उनकी पढ़ाई ने क्या रंग दिखाया? सभी जानते हैं कि उन्होंने अणु विज्ञान और सापेक्षवाद के जनक के रूप में ख्याती प्राप्त की।

अगली स्लाइड पर पढ़ें- कुछ और कहानियां ...

Motivational stories Motivational stories
र्म का सिद्धांत
एक बार जिज्ञासु अग्निवेश ने आचार्य चरक से पूछा- संसार में जो इतने रोग पाए जाते हैं और इतने लोग रोगी होते हैं, इसका क्या कारण है। आचार्य ने बड़ी ही नम्रता से कहा – व्यक्ति के पास जिस स्तर के पाप जमा हो जाते है, उसी के हिसाब से उसे शारीरिक और मानसिक व्याधियां पैदा हो जाती हैं। कर्मफल सिद्धांत पर ही संसार की सारी कार्यवाही गतिशील है। सृष्टि इस कर्मफल के मर्यादा से बंधी हुई है। जो समझदार हैं वे इस शाश्वत सत्य को समझ जाते हैं और कर्मों के फल को खुशी से स्वीकार कर लेते है। मगर जो ज्ञानी होकर भी अज्ञान है और नश्वर दुनिया को सच समझ इसी में लिप्त रहते हैं वे कर्मफल जैसी बातों को फालतू बात मानते हैं।
 
 
Motivational stories Motivational stories
कैसे सुधरा चोर
गुरु नानकदेव सादा जीवन जीते और प्रभु को याद करने की प्रेरणा देते थे। एक बार की बात है उनके पास एक व्यक्ति आया और बोला, बाबा मैं चोरी और दूसरे अपराध करता हूं। मेरा जीवन सुधर जाए, ऐसा कोई उपाय बताइए। गुरु नानक देव जी ने कहा कि, तुम चोरी करना बंद कर दो। सत्य बोलने का व्रत लो। तुम्हारा कल्याण हो जाएगा। वह व्यक्ति उन्हें प्रणाम कर लौट गया।
कुछ दिन बाद वह फिर आया। बोला, बाबा चोरी करने और झूठ बोलने की आदत नहीं छूट रही है। मैं क्या करूं। गुरु नानक जी बोले, भैया, तुम अपने दिन रात का वर्णन चार लोगों के सामने कर दिया करो। चोर ने अगले दिन चोरी की, लेकिन वह लोगों को बता नहीं पाया, क्योंकि उसे डर था कि लोग उससे घृणा करने लगेंगे। उसने उसी क्षण चोरी न करने का संकल्प लिया। कुछ दिन बाद वह नानक देव जी के पास गया और बोला बाबा, आपके सुझाए तरीके ने मुझे अपराधमुक्त कर दिया है। अब में मेहनत की कमाई कर गुजरा करता हूं।