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कैंसर होने के कुछ कारण ये भी है, जानिए इनके उपाय

कैंसर एक ऐसा रोग है जिसका नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छुटने लगते हैं। वर्तमान समय में कैंसर लाइलाज नहीं है,

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:06 PM IST
world cancer day 2018 astrology reasons for cancer

कैंसर एक ऐसा रोग है जिसका नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छुटने लगते हैं। वर्तमान समय में कैंसर लाइलाज नहीं है, लेकिन कुछ ही भाग्यशाली लोग इस भयानक रोग से बच पाते हैं। ज्योतिषविदों की मानें तो ग्रहों की विशेष युति के कारण ही किसी व्यक्ति को कैंसर जैसा भयानक रोग होता है। जन्म कुंडली देखकर कैंसर के पीछे के वास्तविक कारणों को जाना जा सकता है। ज्योतिषियों का तो यह भी कहना है कि यदि समय रहते प्रतिकूल ग्रहों के मंत्रों एवं अन्य उपाय किए जाएं तो कैंसर जैसे रोग से काफी हद तक बचाव हो सकता है।

रविवार को विश्व कैंसर दिवस पर हम आपको बता रहे हैं, कुंडली में किस तरह के ग्रह होने से कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है।

राहु-केतु के कारण हो सकता है कैंसर -

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु-केतु जिन भावों में होते हैं, उनसे संबंधित अंगों में कैंसर की आशंका होती है। इसके अतिरिक्त इनकी जिन ग्रहों से युति हो उनसे संबंधित अंगों में भी कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। इनके अलावा भी जन्म कुंडली में कुछ दोष होने पर कैंसर हो सकता है।


ये उपाय करें -
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में स्थित जिन ग्रहों के कारण कैंसर होने की संभावना बन रही है, उन ग्रहों से संबंधित ज्योतिषिय उपाय करें व उन ग्रहों के जप पूर्ण विधि-विधान से करें। उपरोक्त उपाय करने से कैंसर होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं अथवा कैंसर होने पर भी इसका समुचित उपचार हो जाता है।

- बृहत्पाराशरहोराशास्त्र के अनुसार कुंडली के छठे भाव पर क्रूर ग्रह का प्रभाव होने से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। अगर कुंडली के छठे भाव में राहु व शनि हो तो केंसर या अन्य तरह का असाध्य रोग हो सकता है।

आगे पढ़ें ज्योतिष के अनुसार कैंसर किन ग्रह योगों के कारण हो सकता है-

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-  राहु को विष माना गया है यदि राहु संबंध कुंडली के पहले और छठे या आठवें घर से हो तो  शरीर में विष की मात्रा बढ़ जाती है 

 

- कुंडली के छठे घर की राशि का स्वामी ग्रह कुंडली के आठवें या दसवें घर में हो और उस पर राहु की नजर हो तो कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। 

 

- कुंडली के बारहवे भाव में शनि के साथ मंगल या राहु -केतु हो तो कैंसर रोग की संभावना होती है।

 

- राहु की त्रिक भाव या त्रिकेस पर दृष्टि हो तो भी कैंसर रोग की संभावना बढ़ती है 

 

- कुंडली का छठा घर और छठे घर की राशि का स्वामी पीडित हो या क्रूर ग्रह के नक्षत्र में हो तो भी कैंसर रोग हो सकता है। 

 

- बुध ग्रह त्वचा का कारक है। अगर किसी कुंडली में बुध ग्रह सूर्य, मंगल या शनि से पीड़ित हो और उस पर राहु की दृष्टि हो तो कैंसर होता है।

 

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