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तिथि अनुसार करेंगे इन देवताओं की पूजा तो दूर हो सकती है आपकी हर परेशानी

Dainik Bhaskar

Feb 16, 2018, 05:00 PM IST

पंचांग की सभी तिथियों के अलग-अलग स्वामी हैं।

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हिंदी पंचांग के अनुसार एक माह में दो पक्ष होते हैं। एक कृष्ण पक्ष और एक शुक्ल पक्ष। दोनों की पक्षों में 15-15 तिथियां होती हैं। ज्योतिष में इन तिथियों के अलग-अलग देवता यानी स्वामी बताए गए हैं और इन देवताओं की पूजा करने पर जीवन की परेशानियां जल्दी दूर हो सकती हैं। यहां जानिए उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार किस तिथि पर किसकी पूजा करनी चाहिए...

प्रतिपदा

इसे प्रतिपदा यानी पहली तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं। इनकी उपासना से घर में हमेशा धन-धान्य की बरकत बनी रहती है। साथ ही, उम्र और बल में भी बढ़ोतरी होती है।

द्वितीया

इस तिथि के स्वामी ब्रह्मा जी हैं। इस दिन किसी ब्रह्मचारी ब्राह्मण की पूजा करना और उसे भोजन, अन्न, वस्त्र का दान देना अच्छा होता है।

तृतीया

इस तिथि पर मां गौरी की पूजा करनी चाहिए, इससे पति की उम्र बढ़ती है। कुबेरदेव इस तिथि के स्वामी हैं, इसलिए इनकी भी पूजा करने से समृद्धि मिलती है।

चतुर्थी

इस तिथि के स्वामी गणेशजी हैं, जिन्हें प्रथम पूज्य कहा जाता है। इनके ध्यान और पूजा से सारे विघ्न दूर हो सकते हैं।

पंचमी

इस तिथि के स्वामी नाग देवता हैं। इस दिन नाग की पूजा से भय तथा कालसर्प योग दूर होता है।

षष्ठी

इस तिथि के स्वामी कार्तिकेय हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति सुख-समृद्धि पाता है।

सप्तमी

इस तिथि के स्वामी सूर्य हैं। सूर्य आरोग्य के देवता माने गए हैं। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस तिथि पर सूर्य की पूजा की जाती है।

अष्टमी

इस दिन के स्वामी रुद्र हैं। इस तिथि पर नंदी बैल पर विराजित भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इससे सारी परेशानियां और रोग दूर हो सकते हैं।

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नवमी

इस तिथि पर दुर्गा जी की पूजा करने से यश बढ़ता है। साथ ही, बुरी नजर से मुक्ति मिलती है। शत्रु पर विजय पाने  के लिए दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिए।

दशमी

इस तिथि के देवता यमराज हैं। इस दिन यमराज की पूजा करने से सभी बाधाएं और मृत्यु भय दूर होता है।

एकादशी

इस तिथि के देवता भगवान विश्वेदेवा हैं। इनकी पूजा करने से भक्तों को धन धान्य और भूमि का सुख मिलता है।

द्वादशी

इस तिथि के स्वामी विष्णु जी हैं। इनकी पूजा करने से हर सुख और ऐश्वर्य मिलता है।

 

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त्रयोदशी

इस तिथि के स्वामी कामदेव हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति रूपवान होता है। साथ ही, वैवाहिक जीवन का पूरा सुख भी मिलता है।

चतुर्दशी

इसके स्वामी भगवान शिव हैं। कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन शिवजी की पूजा, अर्चना व रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव मनोकामना पूरी करते हैं।

पूर्णिमा

इस तिथि के देवता चंद्र हैं। पूर्णिमा का व्रत रखने व चंद्र को अर्घ्य देने पर घर में हमेशा सुख और ऐश्वर्य बना रहता है।

अमावस्या

इस तिथि पर पितरों का आधिपत्य है। इस दिन अपने पितरों की शांति के लिए दान और तर्पण करना चाहिए। एेसा करने पर घर में हमेशा बरकत और शांति बनी रहती है।

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