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बुधवार को ऐसे करेंगे गणेशजी की पूजा तो घर में बढ़ सकती है सुख-समृद्धि

श्रीगणेश प्रथम पूज्य देव हैं और इनकी पूजा से हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

Dainik Bhaskar

Feb 19, 2018, 04:34 PM IST
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पूजन में समर्पित की जाने वाली सामग्रियों में सिंदूर बहुत ही शुभ माना गया है। विशेष तौर पर शिव परिवार या शिव के सभी अंश अवतारों पर सिंदूर चढ़ाने का बहुत ही महत्व है। इसके पीछे मान्यता यह है कि सिंदूर शिव के तेज से ही पैदा हुए पारे (धातु) से बना है। शिवजी के पुत्र भगवान श्री गणेश को सिंदूर चढ़ाना या सिंदूर से चोला चढ़ाने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। नित्ककर्म पूजा प्रकाश (पूजा पद्धिति पुस्तक) के अनुसार हर सप्ताह बुधवार को यहां दिए मंत्र के साथ श्री गणेश को सिंदूर अर्पित किया जा सकता है...

मंत्र-

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।

शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्।।

गणेशजी की पूजन से घर-परिवार सहित सभी प्रकार की परेशानियां हो जाती हैं। गणेशजी को शमी के पत्ते भी मुख्य रूप से चढ़ाए जाते हैं। शमी पत्र भी दूर्वा की तरह ही गणेशजी को प्रिय है। शमी एक वृक्ष है। मान्यता है कि इस वृक्ष में शिवजी का वास माना जाता है। बुधवार को गणेशजी को शमी पत्र चढ़ाने पर बुद्धि को प्रखर होती है। क्लेशों का नाश होता है। मानसिक शांति मिलती है।

बुधवार को गणेशजी की पूजा में चावल, फूल, सिंदूर के साथ ही शमी पत्र भी चढ़ाएं। इस दौरान यहां दिए गए मंत्र का जप किया जा सकता है-

मंत्र-

त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै।

शमी दलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक।।

दूसरा उपाय

बुधवार की सुबह स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर घर के मंदिर में या श्रीगणेश मंदिर में एक पान के पत्ते पर सिंदूर में घी मिलाकर या कुमकुम से रंगे चावल से स्वस्तिक बनाएं। इस पर गणपति स्वरूप कलावे यानी नाड़े में लिपटी सुपारी स्थापित करें। श्रीगणेश मूर्ति या स्वरूप की पूजा चावल, पुष्प, वस्त्र, रोली आदि पूजन सामग्री के साथ इस विशेष मंत्र के साथ दूर्वा समर्पित करें-

मंत्र-

दूर्वा करान्सह रितान मृतन्मंगल प्रदान।

आनी तांस्तव पूजार्थ गृहाण परमेश्वर।।

संस्कृत या मंत्रों का ज्ञान न होने पर दूर्वा "ऊँ गं गणपतये नम:" या "श्री गणेशाय नम:" इस मंत्र के साथ भी चढ़ा सकते हैं। गणेशजी को मोदक का भोग लगाएं। अंत में घी के दीप जलाकर आरती करें। धार्मिक नजरिए से श्रीगणेश की विशेष दूर्वा मंत्र के साथ पूजा सभी संकट, बाधाओं को दूर कर अपार सुख और सफलता देने वाली मानी गई है।

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