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ये हैं शिवपुराण के आसान उपाय, इस शुक्रवार कोई 1 करें

प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथियों को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है।

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 05:00 PM IST

भगवान शिव अपने भक्तों को हर सुख प्रदान करते हैं। प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथियों को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है। यह व्रत विभिन्न वारों के साथ संयोग कर अलग-अलग फल प्रदान करता है। इस बार 15 दिसंबर को शुक्रवार होने से शुक्र प्रदोष का योग बन रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। शुक्र प्रदोष व्रत के पालन के लिए शास्त्रोक्त विधान इस प्रकार है। किसी विद्वान ब्राह्मण से यह कार्य कराना श्रेष्ठ होता है-

इस विधि से करें शुक्र प्रदोष
प्रदोष व्रत में बिना जल पीए व्रत रखना होता है। सुबह स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, चावल, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग व इलायची चढ़ाएं।
शाम को पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की षोड्शोपचार (सोलह सामग्रियों) से पूजा करें। भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जाप करें। रात्रि में जागरण करें।
इस प्रकार समस्त मनोरथ पूर्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए व्रती (व्रत रखने वाला) प्रदोष व्रत के धार्मिक विधान का नियम और संयम से पालन करें।

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