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ये 8 उपाय जगा सकते हैं आपका सोया भाग्य, 13 मार्च को करें

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी करते हैं। इस बार ये एकादशी 13 मार्च, मंगलवार को है। इस दिन मुख्य रू

Danik Bhaskar | Mar 12, 2018, 05:00 PM IST

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी करते हैं। इस बार ये एकादशी 13 मार्च, मंगलवार को है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो भगवान विष्णु की कृपा हम पर बनी रहती है और हर इच्छा पूरी हो सकती है। पापमोचनी एकादशी के आसान उपाय जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा
बहुत समय पहले मांधाता नाम के एक पराक्रमी राजा थे। राजा मांधाता ने एक बार लोमश ऋषि से पूछा कि मनुष्य जो जाने-अनजाने में पाप करता है, उससे कैसे मुक्त हो सकता है? तब लोमश ऋषि ने राजा को एक कहानी सुनाई कि चैत्ररथ नामक सुन्दर वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या में लीन थे। इस वन में एक दिन मंजुघोषा नामक अप्सरा की नजर ऋषि पर पड़ी, तो वह उन पर मोहित हो गई और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करने लगी।
कामदेव भी उस समय उधर से गुजर रहे थ। तभी उनकी नजऱ अप्सरा पर गई और उसके मनोभाव को समझते हुए उसकी सहायता करने लगे। अप्सरा अपने प्रयास में सफल हुई और ऋषि की तपस्या भंग हो गई। ऋषि शिव की तपस्या का व्रत भूल गए और अप्सरा के साथ रमण करने लगे। कई वर्षों के बाद जब उनकी चेतना जागी तो उन्हें आभास हुआ कि वह शिव की तपस्या से विरक्त हो चुके हैं। उन्हें तब उस अप्सरा पर बहुत क्रोध आया और तपस्या भंग करने का दोषी जानकर ऋषि ने अप्सरा को श्राप दे दिया कि तुम पिशाचिनी बन जाओ।
श्राप से दु:खी होकर वह ऋषि के पैरों पर गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति के लिए प्रार्थना करने लगी। ऋषि ने तब उस अप्सरा को विधि सहित चैत्र कृष्ण एकादशी (पापमोचिनी एकादशी) का व्रत करने के लिए कहा। भोग में डूबे रहने के कारण ऋषि का तेज भी लोप हो गया था। अत: ऋषि ने भी इस एकादशी का व्रत किया, जिससे उनका पाप भी नष्ट हो गया। उधर अप्सरा भी इस व्रत के प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्त हो गई और उसे सुन्दर रूप प्राप्त हुआ तब वह पुन: स्वर्ग चली गई।