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बचना चाहते हैं शनि की बुरी नजर से 30 दिसंबर को करें ये उपाय

हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत विभिन्न वारों के साथ मिलकर अलग-अलग योग बनाता है।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 05:00 PM IST

हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत विभिन्न वारों के साथ मिलकर अलग-अलग योग बनाता है। इस बार 30 दिसंबर को शनिवार को प्रदोष तिथि होने से शनि प्रदोष का योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए राशि अनुसार उपाय किए जाएं तो शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर कामना पूरी करते हैं। राशि अनुसार उपाय जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

इसलिए शनिदेव चलते हैं धीरे-धीरे
पुराणों में बताया गया है कि शनि की गति मंद यानी धीमी है, लेकिन कम ही लोग ये जानते होंगे कि ऐसा क्यों है? आखिर क्यों शनि मंद गति से चलते हैं। इसके बारे में भी हमारे ग्रंथों में एक कथा का वर्णन है, जो इस प्रकार है-
भगवान शंकर ने अपने परम भक्त दधीचि मुनि के यहां पुत्र रूप में जन्म लिया। भगवान ब्रह्मा ने इनका नाम पिप्पलाद रखा, लेकिन जन्म से पहले ही इनके पिता दधीचि मुनि की मृत्यु हो गई। युवा होने पर जब पिप्पलाद ने देवताओं से अपने पिता की मृत्यु का कारण पूछा तो उन्होंने शनि देव की कुदृष्टि को इसका कारण बताया।
पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए और उन्होंने शनिदेव के ऊपर अपने ब्रह्म दंड का प्रहार किया। शनिदेव ब्रह्म दंड का प्रहार नहीं सह सकते थे। इसलिए वे डर कर भागने लगे। तीनों लोकों की परिक्रमा करने के बाद भी ब्रह्म दंड ने शनिदेव का पीछा नहीं छोड़ा और उनके पैर पर आकर लगा।
ब्रह्म दंड के पैर पर लगने से शनिदेव लंगडे हो गए। तब देवताओं ने पिप्पलाद मुनि से शनिदेव को क्षमा करने के लिए कहा। देवताओं ने कहा कि शनिदेव तो न्यायाधीश हैं और वे तो अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। आपके पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव नहीं है। देवताओं के आग्रह पर पिप्पलाद मुनि से शनिदेव को क्षमा कर दिया।