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ये 11 संकेत बता देते हैं आपकी किस्मत पूरी तरह बदलने वाली है 35 की उम्र के बाद

Dainik Bhaskar

Mar 05, 2018, 05:00 PM IST

कालसर्प दोष के वजह से किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है।

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ज्योतिष में शुभ-अशुभ कई योग बताए गए हैं। एक योग है कालसर्प योग, जिसे आमतौर पर अशुभ ही माना जाता है। इसकी वजह से जीवन में कई परेशानियां एक साथ आ सकती हैं। कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति का जीवन 35 की उम्र के बाद पूरी तरह बदल जाता है। यहां जानिए उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार दैनिक जीवन के कुछ ऐसे संकेत जो बता देते हैं कि व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है और 35 की उम्र के बाद उसका जीवन बदल सकता है।

कैसे बनता है कालसर्प दोष

पं. शर्मा के अनुसार ज्योतिष में कुल नौ ग्रह बताए गए हैं। इन ग्रहों में राहु-केतु छाया ग्रह हैं और जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी 7 ग्रह राहु-केतु के बीच में आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष बनता है। इस दोष की वजह से कार्यों में परेशानियां आती हैं, घर में शांति नहीं रह पाती है। कुंडली में राहु-केतु के अंश, उनकी स्थिति, उनकी दृष्टि देखकर ही कालसर्प योग की पूजा करवाना उचित रहता है।

35 उम्र के बाद बदल जाता है पूरा जीवन

कभी-कभी इंसान 35 वर्ष तक की आयु तक आराम की जिंदगी गुजारता है और अचानक धन हानि होने लगती है, वह गरीब हो जाता है। जबकि कुछ लोग 35 वर्ष तक गरीब रहते हैं और अचानक वे धनवान हो जाते है। ऐसा राहु-केतु की वजह से होता है। राहु-केतु रहस्यमयी ग्रह हैं। जिस व्यक्ति पर राहु-केतु की कृपा हो जाती है, वह ऊंचे शिखर पर पहुंचता है। जानिए कालसर्प दोष से जुड़े कुछ संकेत और इस दोष से बचने के उपाय...

ये हैं कालसर्प दोष के संकेत

1. बुरे सपने आना।
2. अकारण मन में डर होना।
3. रात में डरना।
4. नींद में चमकना।
5. बार-बार सांप दिखाई देना।
6. मृत्यु देखना।
7. किसी साये का पास में खड़े होने का आभास होना।
8. सफलता के अंतिम पड़ाव में पहुंचने के बाद असफल होना।
9. अनचाही बात पर विवाद बढ़ना।
10. शत्रुओं की संख्या बढ़ना।
11. किसी असाध्य रोग का इलाज होने पर भी फायदा न होना।

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कालसर्प योग दूर करने के उपाय

1. शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाएं। शिव भगवान का रुद्राभिषेक करें।
2. हर साल नागपंचमी का व्रत करें। मोर पंख अपने घर में हमेशा रखें।
3. अपने कुल देवता की पूजा रोज करें।
4. रोज महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
5. हनुमान चालीसा का पाठ रोज करें।
6. मंगलवार और शनिवार को श्रीरामचरित मानस के सुंदरकाण्ड का पाठ करें।

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