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गौतम बुद्ध की इन बातों से आपकी हर परेशानी दूर हो सकती है

जिसकी जितनी झोली होती है, उतना ही दान वह समेट पाता है

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 05:00 PM IST
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एक सभा में गौतम बुद्ध ने प्रवचन खत्म करते हुए कहा कि जागो, समय हाथ से निकला जा रहा है और सभा खत्म कर दी। सभा के बाद उन्होंने अपने शिष्य आनंद से कहा, चलो थोड़ी दूर घूम कर आते हैं। आनंद बुद्ध के साथ चल दिए। वे दोनों विहार के मुख्य द्वार तक ही पहुंचे थे कि एक किनारे रुक कर खड़े हो गए। प्रवचन सुनने आए लोग एक-एक कर बाहर निकल रहे थे, इसलिए वहां भीड़ सी लग गई थी। अचानक भीड़ में से निकल कर एक महिला गौतम बुद्ध से मिलने आई। उसने कहा तथागत मै नर्तकी हूं। आज नगर के एक सेठ के यहां मेरे नृत्य का कार्यक्रम तय हुआ है, लेकिन मैं ये भूल चुकी थी। आपने कहा, समय निकला जा रहा है तो मुझे तुरंत ये बात याद आ गई, इसके लिए धन्यवाद।

उसके बाद एक डकैत बुद्ध के पास आया। उसने कहा, तथागत मैं आपसे कोई बात छिपाऊंगा नहीं। मैं भूल गया था कि आज मुझे एक जगह डाका डालने जाना था कि आज उपदेश सुनते ही मुझे अपनी योजना याद आ गई। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

उसके जाने के बाद धीरे-धीरे चलता हुआ एक वृद्ध बुद्ध के पास आया। वृद्ध ने कहा, तथागत। जीवनभर दुनिया की चीजों के पीछे भागता रहा। अब मौत का सामना करने का दिन नजदीक अाता जा रहा है, अब मुझे लगता है कि सारा जीवन यूं ही बेकार हो गया। आपकी बातों से आज मेरी आंखें खुल गईं। आज से मैं अपने सारे मोह छोड़कर सिर्फ आत्म कल्याण के लिए कोशिश करना चाहता हूं। जब सभी लोग वहां से चले गए तब बुद्ध ने कहा, देखो आनंद। प्रवचन मैंने एक ही दिया, लेकिन सभी ने उसका मतलब अलग-अलग निकाला। जिसकी जितनी झोली होती है, उतना ही दान वह समेट पाता है। आत्म कल्याण के लिए भी मन की झोली को उसके लायक बनाना चाहिए, इसके लिए मन का शुद्ध होना बहुत जरूरी है।

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