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ये राज योग व्यक्ति को बना सकते हैं धनवान

गुरु केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही (धनु या मीन राशि में हो) या उच्च राशि (कर्क राशि) का हो तब हंस योग होता है

Dainik Bhaskar

Nov 14, 2017, 05:00 PM IST
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जिन लोगों की कुंडली में राजयोग होते हैं, उन्हें सभी सुख-सुविधाएं मिलती हैं और वे शाही जीवन व्यतीत करते हैं। यहां जानिए कुंडली के कुछ खास राजयोग...
रुचक योग
मंगल केंद्र भाव में होकर अपने मूल त्रिकोण (पहला, पांचवा और नवां भाव), स्वगृही (मेष या वृश्चिक भाव में हो तो) अथवा उच्च राशि (मकर राशि) का हो तो रूचक योग बनता है। रुचक योग होने पर व्यक्ति बलवान, साहसी, तेजस्वी, उच्च स्तरीय वाहन रखने वाला होता है। इस योग में जन्मा व्यक्ति विशेष पद प्राप्त करता है।
भद्र योग
बुध केंद्र में मूल त्रिकोण स्वगृही (मिथुन या कन्या राशि में हो) अथवा उच्च राशि (कन्या) का हो तो भद्र योग बनता है। इस योग से व्यक्ति उच्च व्यवसायी होता है। व्यक्ति अपने प्रबंधन, कौशल, बुद्धि-विवेक का उपयोग करते हुए धन कमाता है। यह योग सप्तम भाव में होता है तो व्यक्ति देश का जाना माना उद्योगपति बन जाता है।
हंस योग
बृहस्पति केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही (धनु या मीन राशि में हो) अथवा उच्च राशि (कर्क राशि) का हो तब हंस योग होता है। यह योग व्यक्ति को सुन्दर, हंसमुख, मिलनसार, विनम्र और धन-संपत्ति वाला बनाता है। व्यक्ति पुण्य कर्मों में रुचि रखने वाला, दयालु, शास्त्र का ज्ञान रखने वाला होता है।
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मालव्य योग
कुंडली के केंद्र भावों में स्थित शुक्र मूल त्रिकोण अथवा स्वगृही (वृष या तुला राशि में हो) या उच्च (मीन राशि) का हो तो मालव्य योग बनता है। इस योग से व्यक्ति सुंदर, गुणी, तेजस्वी, धैर्यवान, धनी तथा सुख-सुविधाएं प्राप्त करता है।
शश योग
यदि कुंडली में शनि की खुद की राशि मकर या कुंभ में हो या उच्च राशि (तुला राशि) का हो या मूल त्रिकोण में हो तो शश योग बनता है। यह योग सप्तम भाव या दशम भाव में हो तो व्यक्ति अपार धन-संपत्ति का स्वामी होता है। व्यवसाय और नौकरी के क्षेत्र में ख्याति और उच्च पद को प्राप्त करता है।
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गजकेसरी योग
जिस व्यक्ति की कुंडली में शुभ गजकेसरी योग होता है, वह बुद्धिमान होने के साथ ही प्रतिभाशाली भी होता है। इनका व्यक्तित्व गंभीर व प्रभावशाली होता है। समाज में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करते हैं। आर्थिक मामलों में यह बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। गजकेसरी योग की शुभता के लिए यह आवश्यक है कि गुरु व चंद्र दोनों ही नीच के नहीं होना चाहिए। साथ ही, ये दोनों ग्रह शनि या राहु जैसे पापग्रहों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
लक्ष्मी योग
कुंडली के किसी भी भाव में चंद्र-मंगल का योग बन रहा है तो जीवन में धन की कमी नहीं होती है। मान-सम्मान मिलता है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।
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