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वास्तु दोष खत्म कर पैसा और प्रमोशन दिलाते हैं ये 8 मंत्र

घर बनवाते समय जाने अनजाने में ऐसी गलती हो जाती है, जिससे घर में वास्तु दोष हो सकता है। इसके अलावा कई बार घर की साज- सजाव

Danik Bhaskar | Mar 11, 2018, 05:00 PM IST

घर बनवाते समय जाने अनजाने में ऐसी गलती हो जाती है, जिससे घर में वास्तु दोष हो सकता है। इसके अलावा कई बार घर की साज- सजावट और घर में रखे सामानों से भी वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, वास्तु दोष का असर कम करने और धन लाभ और सफलता पाने के लिए वास्तु में कई उपाय बताए गए हैं। वास्तु दोष दूर करने के लिए इन मंत्रों की भी मदद ली जा सकती है। इन 8 मंत्रों के जाप से अपको धन और सुख की भी प्राप्ति हो सकती है।

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का महत्व
उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम ये चार मूल दिशाएं हैं। वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं हैं। आकाश और पाताल को भी इसमें दिशा स्वरूप शामिल किया गया है। इस प्रकार चार दिशा, चार विदिशा और आकाश, पाताल को जोड़कर इस विज्ञान में दिशाओं की संख्या कुल दस माना गया है। मूल दिशाओं के मध्य की दिशा ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य को विदिशा कहा गया है।

पूर्व दिशा
वास्तु शास्त्र में यह दिशा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि यह सूर्य के उदय होने की दिशा है। इस दिशा के स्वामी देवता इन्द्र हैं।

पश्चिम दिशा
इस दिशा के स्वामी शनिदेव हैं।

उत्तर दिशा
इस दिशा के स्वामी कुबेरदेव हैं।

दक्षिण दिशा
इस दिशा के स्वामी यम देव हैं। यह दिशा वास्तु शास्त्र में सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है। इस दिशा को खाली नहीं रखना चाहिए।

आग्नेय दिशा
पूर्व और दक्षिण के मध्य की दिशा को आग्नेय दिशा कहते हैं। अग्निदेव इस दिशा के स्वामी हैं।

नैऋत्य दिशा
दक्षिण और पश्चिम के मध्य की दिशा को नैऋत्य दिशा कहते हैं। इस दिशा का वास्तुदोष दुर्घटना, रोग एवं मानसिक अशांति देता है।

ईशान दिशा
ईशान दिशा के स्वामी भगवान शिव हैं। इस दिशा में कभी भी शौचालय नहीं बनाना चाहिए।

वायव्य दिशा
इस दिशा के स्वामी चंद्रदेव हैं।