Tirth Darshan

  • Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple
--Advertisement--

श्रीकृष्ण के काल से धरती पर मौजूद है ये चमत्कारी मूर्ति, कलियुग में है खास महत्व

कलियुग के प्रारंभ में मिली थी कृष्ण की ये मूर्ति, बृहस्पति ने की थी इसकी स्थापना

Dainik Bhaskar

Feb 20, 2018, 05:00 PM IST
Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple

केरल से लगभग 30 कि.मी. की दूरी पर गुरुवायूर नाम के स्थान पर भगवान कृष्ण का एक खास मंदिर पाया जाता है। इस मंदिर के खास होने के पीछे इन मंदिर की एक कथा जुड़ी हुई है। आमतौर पर इस जगह को दक्षिण की द्वारका के नाम से भी पुकारा जाता है।

गुरुवायूर त्रिशूर जिले का एक गांव है। यह स्थान भगवान कृष्ण के मंदिर की वजह से बहुत खास माना जाता है। गुरुवायूर केरल के लोकप्रिय तीर्थ स्थलों में से एक है।

कैसे स्थापित हुई थी श्रीकृष्ण की ये मूर्ति

यहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय मित्र उद्धव के हाथों देवगुरु श्रीबृहस्पति को एक बहुत ही जरूरी संदेश भेजा। इस संदेश में श्रीकृष्ण ने कहां कि समुद्र, द्वारका को डुबो दें। लेकिन इससे पहले श्रीकृष्ण के माता-पिता जिस देव मूर्ति की पूजा किया करते थे, उसे किसी सुरक्षित और पावन जगह पर स्थापित कर दें। यही मूर्ति कलियुग भक्तों के लिए कल्याणकारी साबित होगी। तब बृहस्पति देव और वायु देव ने इसे गुरुवायूर में स्थापित कर दिया। इसी तरह कलियुग की शुरुवात से ही ये मूर्ति भक्तों का कल्याण करने के लिए धरती पर मौजूद है।

तीन शब्दों से मिलकर बना हैं गुरुवायूर

कहा जाता है कि इस स्थान का नाम गुरुवायूर होने के पीछे एक खास कारण है। ‘गुरु’ का अर्थ है देवगुरु बृहस्पति, ‘वायु’ का मतलब है भगवान वायु और ‘ऊर’ एक मलयालम शब्द है, जिसका अर्थ होता है भूमि। इस स्थान का नाम गुरुवायुर पड़ने के पीछे यहां की स्थापना की कथा है। इस जगह पर मंदिर स्थापना का संबंध देवगुरु बृहस्पति और वायु देव से हैं, जिसके चलते इस जगह का नाम गुरुवायूर पड़ गया।

ऐसी है यहां की मूर्ति

गुरुवायुरप्पन मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति यहां के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यहां स्थित भगवान कृष्ण की मूर्ति के चार हाथ हैं, जिसमें से भगवान ने एक हाथ में शंख, दूसरे में सुदर्शन चक्र, तीसरे में और चौथे में कमल धारण कर रखा है। इस मंदिर को भूलोका वैकुंठम के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ होता है ‘पृथ्वी पर भगवान विष्णु का वास’।

कैसे पहुंचें

हवाई मार्ग- गुरुवायूर से सबसे पास में लगभग 88 कि.मी. की दूरी पर कोचीन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थित है। वहां तक हवाई मार्ग से आकर रेल या सड़क मार्ग से गुरुवायूर पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग- देश के लगभग सभी बड़े शहरों से गुरुवायूर के लिए रेल गाडियां चलती हैं।

सड़क मार्ग- गुरुवायूर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग का भी प्रयोग किया जा सकता है।

गुरुवायुरप्पन मंदिर के आस-पास घूमने के स्थान

1. वेंकटचलपति मंदिर- गुरुवायुरप्पन मंदिर से कुछ दूरी पर भगवान वेंकटचलपति का सुंदर मंदिर है।

2. मम्मियूर महादेव मंदिर- मम्मियूर महादेव मंदिर गुरुवायूर का प्रसिद्ध शिव मंदिर है।

3. पलायुर चर्च- पलायुर चर्च गुरुवायूर की प्रसिद्ध जगहों में से एक है।

आगे देखें मंदिर की कुछ खास तस्वीरें...

Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple
Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple
X
Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple
Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple
Guruvayoor temple history, Story of guruvayoor temple
Click to listen..