• history and importance of radha kund krishna kund
विज्ञापन

राधा-कृष्ण ने अपने हाथों से बनाए थे ये 2 कुंड, स्नान करने पर मिलता है ये लाभ

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 05:00 PM IST

राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है ये कुंड, संतान पाने के लिए किया जाता है स्नान

history and importance of radha kund krishna kund
  • comment

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप माना जाता हैं, क्योंकि इसी नगर में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहां का पूरा क्षेत्र कान्हा की भक्ति और कृपा से भरा हुआ है। मथुरा के पास अरिता नाम के गांव में 2 सरोवर है, जिन्हें राधा कुंड और कृष्ण कुंड कहा जाता है। राधा कुंड के विषय में मान्यता है कि यदि किसी दंपत्ति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है और वे अहोई अष्टमी (कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी) की मध्य रात्रि को इस कुंड में स्नान करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो सकती है।

राधा कुंड से जुड़ी कथा

इस कुंड के संबंध में प्रचलित कथा के अनुसार कंस भगवान श्रीकृष्ण का वध करना चाहता था। इसके लिए कंस ने अरिष्टासुर नाम के राक्षस को भी भेजा था। अरिष्टासुर बछड़े का रूप बनाकर श्रीकृष्ण की गायों में शामिल हो गया और बाल-ग्वालों को मारने लगा। श्रीकृष्ण ने बछड़े के रूप में छिपे राक्षस को पहचान लिया और उसे पकड़कर जमीन पर पटक-पटककर उसका वध कर दिया। यह देखकर राधा ने श्रीकृष्ण से कहा कि उन्हें गौहत्या का पाप लग गया है और इस पापा की मुक्ति के लिए उन्हें सभी तीर्थों के दर्शन करने चाहिए। राधा के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने देवर्षि नारद से इसका उपाय पूछा। देवर्षि नारद ने उन्हें उपाय बताया कि वह सभी तीर्थों का आह्वान करके उन्हें जल रूप में बुलाएं और उन तीर्थों के जल को एकसाथ मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से गौहत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। देवर्षि के कहने पर श्रीकृष्ण ने एक कुंड में सभी तीर्थों के जल को आमंत्रित किया और कुंड में स्नान करके पापमुक्त हो गए। उस कुंड को कुष्ण कुंड कहा जाता है, जिसमें स्नान करके श्रीकृष्ण गौहत्या के पाप से मुक्त हुए थे।

श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के बनाया था यह कुंड

मान्यता के अनुसार कृष्ण कुंड का निर्माण श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से किया था। नारद के कहने पर श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के एक छोटा सा कुंड खोदा और सभी तीर्थों के जल से उस कुंड में आने की प्रार्थना की। भगवान के बुलाने पर सभी तीर्थ वहां जल रूप में आ गए। माना जाता है कि तभी से सभी तीर्थों का अंश जल रूप में यहां स्थित है।

इस तरह हुई थी राधा कुंड की स्थापना

श्रीकृष्ण के बनाए कुंड को देखकर राधा ने उस कुंड के पास ही अपने कंगन से एक और छोटा सा कुंड खोदा। जब भगवान ने उस कुंड को देखा तो हर रोज उसी कुंड में स्नान करने का और उनके बनाए कृष्ण कुंड से भी ज्यादा प्रसिद्ध होने का वरदान दिया। उस कुंड को देवी राधा ने बनाया था, इसीलिए वह राधा कुंड के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

अहोई अष्टमी पर हुआ था इन कुंडों का निर्माण

माना जाता है कि अहोई अष्टमी तिथि पर इन दोनों कुंडों का निर्माण हुआ था। इसीलिए अहोई अष्टमी पर यहां स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में बड़ी संख्या में लोग स्नान करते है। यहां स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

कुंडों की विशेषत

कृष्ण कुंड और राधा कुंड की विशेषता है कि दूर से देखने पर कृष्ण कुंड का जल काला और राधा कुंड का जल सफेद दिखाई देता है। जो कि श्रीकृष्ण के काले वर्ण के होने का और देवी राधा के सफेद वर्ण के होने का प्रतीक है।

आगे देखें राधा-कृष्ण कुंड की कुछ खास तस्वीरें...

history and importance of radha kund krishna kund
  • comment
history and importance of radha kund krishna kund
  • comment
history and importance of radha kund krishna kund
  • comment
history and importance of radha kund krishna kund
  • comment
history and importance of radha kund krishna kund
  • comment
X
history and importance of radha kund krishna kund
history and importance of radha kund krishna kund
history and importance of radha kund krishna kund
history and importance of radha kund krishna kund
history and importance of radha kund krishna kund
history and importance of radha kund krishna kund
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन