• story of pavagarh kali temple and peer dargah
--Advertisement--

हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए खास है ये जगह, जुड़ी हैं कई रहस्यमयी कहानियां

मंदिर: जहां से भगवान राम के पुत्र लव-कुश ने पाया था मोक्ष

Dainik Bhaskar

Jan 02, 2018, 05:00 PM IST
story of pavagarh kali temple and peer dargah

गुजरात के पंचमहल जिले में बना पावागढ़ महाकाली का मंदिर पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। यहां की खास बात यह है कि यहां दक्षिणमुखी काली मां की मूर्ति है, जिसका तांत्रिक पूजा में बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

पावागढ़ काली मंदिर से कई ऐतिहासिक और धार्मिक रहस्य जुड़े हुए हैं, जो कि इस जगह को और भी खास बनाते हैं। कुछ बातें भगवान राम के पुत्र लव-कुश से जुड़ी हैं, तो कुछ ऋषि विश्वामित्र से। इनके साथ ही मुस्लिमों के लिए भी इस जगह का खास महत्व है।

जानिए पावागढ़ से जुड़ी कहानियां-

इसलिए पड़ा इस जगह का नाम पावागढ़-

पावागढ़ के नाम के पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहते हैं एक जमाने में इस दुर्गम पर्वत पर चढ़ाई लगभग असंभव थी। चारों तरफ खाइयों से घिरे होने के कारण यहां हवा का वेग भी हर तरफ बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए इसे पावागढ़ अर्थात वैसी जगह जहां पवन (हवा) का हमेशा वास हो कहा जाता है।

पावागढ़ पहाड़ियों की तलहटी में चंपानेरी नगरी है, जिसे महाराज वनराज चावड़ा ने अपने बुद्धिमान मंत्री के नाम पर बसाया था। पावागढ़ पहाड़ी की शुरुआत चंपानेर से होती है। 1471 फीट की ऊंचाई पर माची हवेली है। मंदिर तक जाने के लिए माची हवेली से रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। यहां से पैदल मंदिर तक पहुंचने लिए लगभग 250 सीढ़ियां चढ़नी पढ़ती हैं।

लव-कुश सहित कई ऋषियों ने यहीं पाया था मोक्ष

पावागढ़ का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है। बताया जाता है कि यह मंदिर अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम के समय का है। इस मंदिर को एक जमाने में शत्रुंजय मंदिर कहा जाता था। मान्यता हैं कि भगवान राम के पुत्र लव और कुश, कई ऋषियों और बौद्ध भिक्षुओं ने यहां मोक्ष प्राप्त किया था।

विश्वामित्र ने स्थापित की थी यहां मां काली की मूर्ति

यह भी माना जाता हैं कि मां काली की मूर्ति को विश्वामित्र ने ही स्थापित किया था। यहां बहने वाली नदी का नाम भी उन्हीं के नाम पर विश्वामित्री पड़ा।


हिंदूओं के साथ-साथ मुस्लिमों के लिए भी खास है ये जगह

मंदिर की छत पर मुस्लिमों का पवित्र स्थल है, जहां सदन शाह पीर की दरगाह है। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम श्रद्धालु भी दर्शन करने के लिए आते हैं। इसी वजह से ये जगह हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिमों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है और यही बात इस जगह को और भी खास बनाती है।

कैसे पहुंचें-

पावागढ़ से लगभग 50 कि.मी. की दूरी पर गुजरात के मुख्य शहरों में से एक वडोदरा है। देश के लगभग सभी बड़े शहरों से वडोदरा के लिए हवाई जाहज, रेल गाड़ियां और बसें चलती हैं। वडोदरा से किसी भी निजी साधन या बस आदि की मदद से पावागढ़ पहुच सकते हैं।

आगे की स्लाइड्स पर देखें यहां की कुछ खास तस्वीरें...



story of pavagarh kali temple and peer dargah
story of pavagarh kali temple and peer dargah
story of pavagarh kali temple and peer dargah
X
story of pavagarh kali temple and peer dargah
story of pavagarh kali temple and peer dargah
story of pavagarh kali temple and peer dargah
story of pavagarh kali temple and peer dargah
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..