Tirth Darshan

  • story of kashtbhanjan hanuman temple
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आखिर क्यों यहां हनुमान के चरणों में स्त्री बनकर बैठे हैं शनिदेव, अनोखा है कारण

मंदिर: जब स्त्री रूप धारण करके हनुमान के पैरों में बैठ गए थे शनि देव

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2017, 05:00 PM IST
story of kashtbhanjan hanuman temple

गुजरात में भावनगर के सारंगपुर में भगवान हनुमान का एक प्राचीन मंदिर है, जिसे कष्टभंजन हनुमानजी के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर अपने आप में ही खास है, क्योंकि इस मंदिर में भगवान हनुमान के साथ शनिदेव विराजित हैं। इतना ही नहीं यहां पर शनिदेव स्त्री रूप में हनुमान के चरणों में बैठे दिखाई देते हैं। ऐसा होने के पीछे एक पौराणिक कथा है।

क्यों हनुमान के पैरे में स्त्री रूप में बैठे हैं शनिदेव

पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि एक समय शनिदेव का प्रकोप काफी बढ़ गया था। शनिदेव के प्रकोप के कारण सभी लोगों को कई दुःखों और परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा था। शनिदेव से बचने के लिए भक्तों ने भगवान हनुमान से प्रार्थना की। भक्तों की प्रार्थना सुनकर भगवान हनुमान शनिदेव पर क्रोधित हो गए और उन्हे दण्ड देने का निश्चय किया।

जब शनिदेव को यह बाच पता चली तो वे बहुत डर गए और हनुमानजी के क्रोध से बचने के लिए उपाय सोचने लगे। शनिदेव यह बात जानते थे कि हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और वे स्त्रियों पर हाथ नहीं उठाते हैं। इसलिए, हनुमानजी के क्रोध से बचने के लिए शनिदेव ने स्त्री का रूप धारण कर लिया और हनुमानजी के चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगे और भक्तों पर से अपना प्रकोप भी हटा लिया। तब से लेकर आज तक इस मंदिर में शनिदेव को हनुमानजी के चरणों में स्त्रीरूप में ही पूजा जाता है। भक्तों के कष्टों का निवारण करने के कारण इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।

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यहां दूर हो जाते है सारे शनि दोष

 

इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यदि किसी भी भक्त की कुंडली में शनि दोष हो तो कष्टभंजन हनुमान के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से सभी दोष खत्म हो जाते है। इसी वजह से इस मंदिर में सालभर भक्तों की भीड़ लगी रहती हैं।

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किले के समान है मंदिर परिसर

 

सारंगपुर में कष्टभंजन हनुमान मंदिर का परिसर बहुत विशाल है। यह किसी किले के समान दिखाई देता है। यह मंदिर अपने पौराणिक महत्व के साथ-साथ मंदिर की सुंदरता और भव्यता के लिए भी प्रसिद्ध है। कष्टभंजन हनुमानजी सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं और उन्हें महाराजाधिराज के नाम से भी जाना जाता है। हनुमानजी की प्रतिमा के आसपास वानर सेना दिखाई देती है।

 

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