बिग बाॅस आपको बताना चाहते हैं कि आज आप सभी को एक टास्क दिया जाएगा - राष्ट्र निर्माण। इसमें आपको भाग लेकर राष्ट्र निर्माण के बारे में सोचना होगा।
फिर सन्नाटा...।बिग बाॅस की अावाज के बाद चार सेकंड का रुटीन सन्नाटा। नेताजी ने चुप्पी तोड़ी : ‘सोचो भाई, सोचो।’
पुलिस अफसर : ये ससुरे
बिग बॉस ने कहां का टास्क दे दिया। सोचने का काम तो बड़ा टेढ़ा काम है जी।
नेता : तो भई आपको किसने कहा सोचने का! आप मत सोचिए। आप तो हवाई जहाज का ध्यान रखिए। कोई किडनैप कर ले। नहीं तो स्साला, आज देश बड़ा समझदार हो गया है। हमें बचाने के लिए मरा हुआ सांप भी नहीं छोड़ेगा कोई।
पुलिस अफसर : ये ठीक है। वैसे सर, राष्ट्र निर्माण में तो आपकी मास्टरी है। आप ही बताइए ना।
नेता : देिखए, जमाना बदल रहा है। सबकी भागीदारी से राष्ट्र का निर्माण हो तो अच्छा है। फिर (इंजीनियर से) : मिश्राजी, आपके दिमाग में राष्ट्र निर्माण के बारे में कुछ रहा है क्या?
इंजीनियर : सर, कुछ बजटीय प्रावधान पता चले तो आगे की सोचें। अाप तो जानते ही हैं कि यह गाइडलाइन बहुत जरूरी है कि राष्ट्र निर्माण के लिए हम कितने के टेंडर जारी कर सकते हैं।
नेता (बड़े अफसर से) : अब आप भी यहीं हैं तो करवाइए जल्दी गाइडलाइन-वाइडलाइन जारी।
अफसर (धीरे से) : एक्चुअली सर, जगह-जगह कैमरे लगे हुए हैं। इसीलिए मैं राष्ट्र निर्माण करने से बच रहा हूं।
नेता : लेकिन शर्माजी, कैमरे कहां नहीं होते। आप तो वैसे भी नजरों से बच-बचाकर राष्ट्र निर्माण कर लेते हैं। तो यहां भी बता दीजिए। टास्क पूरा करेंगे तो ही खाने-पीने का बजट मिलेगा। बड़े ही उलटे-सीधे रूल हैं यहां के।
ठेकेदार (धीरे से) : सर, खाने-पीने की चिंता आप क्यों करते हैं? हमेशा की तरह
मैं हूं ना?
नेताजी : अरे भाई, खाना-पीना अपनी जगह है। वह भी जरूरी है। लेकिन राष्ट्र निर्माण… सबसे बड़ा मुद्दा तो यहां यही अटका है। (फिर कुछ देर विराम लेने के बाद) अरे भाई, जरा आम आदमी से भी पूछ लेते हैं। आखिर राष्ट्र निर्माण में उसका भी कोई दायित्व बनता है।
कहां है आम आदमी… अबे आम आदमी कहां है तू?… यहां हम राष्ट्र निर्माण कर रहे हैं। तेरे लिए कर रहे हैं और ससुरा तू गायब है!
इतने में बिग बॉस की आवाज : बिग बॉस आपको बताना चाहते हैं कि आपके टास्क का समय समाप्त हो गया है। आप सब अपने टास्क में सफल रहे हैं।
फिर सन्नाटा..। बिग बाॅस की अावाज के बाद चार सेकंड का रुटीन सन्नाटा। लेकिन यह आम आदमी है कहां? एक आवाज।
सरजी, वह तो टॉयलेट में मस्त है। ऐसा टॉयलेट उसने देखा ही नहीं कभी! दूसरी आवाज।
फिर सभी के मिले-जुले ठहाके। राष्ट्र निर्माण का टास्क सब पूरा कर चुके हैं। सब खुश हैं कि अब उन्हें राशन का पूरा बजट मिल सकेगा। आम आदमी को मिलेगी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में शामिल होने की सजा। उसे भूखा ही सोना पड़ेगा। बिग बॉस का यही आदेश है।