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गुरुजी प्लीज छिपकली खाओ!

7 वर्ष पहले
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एक बच्चा जिद पर अड़ गया। बोला कि छिपकली खाऊंगा। घरवालों ने बहुत समझाया पर नहीं माना। हार कर उसके गुरुजी को बुलाया गया। वे जिद तुड़वाने में महारथी थे। गुरु के आदेश पर एक छिपकली पकड़वाई गई। उसे प्लेट में परोसकर बालक के सामने रख गुरु बोले, ‘ले खा।’ बच्च मचल गया। बोला, ‘नहीं तली हुई खाऊंगा।’ गुरु ने छिपकली तलवाई और दहाड़े, ‘ले अब चुपचाप खा।’ बच्च फिर गुलाटी मार गया और बोला, ‘आधी खाऊंगा।’ छिपकली के दो टुकड़े किए गए। बच्च गुरु से बोला, ‘पहले आप खाओ।’ गुरु ने आंख, नाक और भी ना जाने क्या-क्या भींच किसी तरह आधी छिपकली निगली। उनके छिपकली निगलते ही बच्च दहाड़ मारकर रोते हुए बोला, ‘आप तो वह टुकड़ा खा गए जो मुझे खाना था!’