मंत्र पढ़वाए जो पंडित ने वे हम पढ़ने लगे,
यानी मैरिज की कुतुब मीनार पर चढ़ने लगे।
आए दिन चिंता के फिर दौरे हमें पड़ने लगे,
‘इनकम’ उतनी ही रही, बच्चे मगर बढ़ने लगे।
क्या करें हम, सर से अब पानी गुजर जाने को है,
सात दुमछल्ले हैं घर में, आठवां आने को है।
घर के अन्दर मचती रही है सदा चीखो-पुकार,
आज है पप्पू को पेचिश, कल था बंटी को बुखार।
जानकर भी ठोकरें खाई हैं हमने बार-बार,
शादी होते ही शनीचर हो गया हम पर सवार।
अब तो राहु की दशा हम पे चढ़ जाने को है,
सात दुमछल्ले हैं घर में, आठवां आने को है।
कोई ‘वैकेन्सी’ नहीं, घर हो गया बच्चों से ‘पैक’,
खोपड़ी अपनी फिरी भेजा हुआ बीवी का ‘क्रैक’।
खाइयां खोदें, कहीं छुपकर बचाएं अपनी ‘बैक’,
होने वाला है हम पर आठवां ‘एयर-अटैक’।
घर में फिर खतरे का भोंपू भैरवी गाने को है,
सात दुमछल्ले हैं घर में, आठवां आने को है।
अल्हड़ ‘बीकानेरी’