लू-प्याज की ओर से ध्यान हटाकर उनसे बातें करने की बहुत कोशिश करता हूं पर एक वे हैं कि पड़ोसन की तरह निष्ठुर होते जा रहे हैं। अरे भगवान! जो तुम भी मुझसे रूठ गए तो मेरे जीवन का सहारा फिर रहेगा कौन? बीवी तो जब देखो टुचर-टुचर लगाए रहती है।
भक्तो! पहले मेरा भगवान से बातें करना आसान था, बीवी से मुश्किल। बीवी तो जब देखो मुंह फुलाए चारपाई पर बैठी हाथ में रिमोट, होंठों पर आठ पहर, चैबीसों घंटे कोई कोई शिकायत लिए बैठी रहती है। काम की काज की, दुश्मन सरकारी अनाज की!
आज फिर भगवान का इंतजार करते-करते दूसरी बाती भी जला डाली, पर अब भी भगवान नहीं आए तो बहुत निराश हुआ। चारपाई पर बैठी, हाथ में रिमोट थामे श्रीमती बराबर चीखे जा रही थीं कि ढोंग पूरा हो गया हो तो अब नौटंकी खत्म करो। गैस पर रखा दूध उबल गया तो मुझसे बुरा कोई होगा। मैं कहना तो चाहता था कि दूध भी उबले तो तुमसे बुरा कौन?
कि तभी भगवान प्रगट हो गए तो मेरी प्रसन्नता का पारावार रहा। पर जब उनको सहमा-सहमा सा देखा तो मैं चिंतित हो उठा, ‘हे मेरे प्रभु! इस देश में एक आप ही तो हो जिनके चेहरे पर मैंने आजतक किसी भी तस्वीर में चिंता की रेखाएं नहीं देखीं।’ तो वे मेरी बगल में बैठते बोले, ‘भक्त! ये लोकतंत्र है। यहां वोटर से लेकर सरकार तक सब परेशान ही परेशान हैं।’
‘पर ये सब तो शरीरधारी हैं और आप अशरीरी? इनसे अपनी तुलना करो प्रभु!’
‘यहां क्या शरीरी तो क्या अशरीरी! लोकतंत्र है सो सब समान हैं! सबके चेहरों पर बस अजर- अमर है तो थकान है। थकान अजर है अमर है। वह गठजोड़ की रीढ़ है तो जनता की कमर है।’
‘अच्छा छोड़िए ये लोकतंत्र की बातें... लोक अनंत, लोकतंत्र दशा अनंता! कल तक तो आप...’
‘परेशान हूं कि कल वे भी मुझे भगवान मानने से इंकार कर दें! अगर ऐसा हो गया तो ना जाने फिर में क्या करूंगा, कहां जाऊंगा?’
आह! रे प्रभु! ये मुआ पद का लोभ किसे नहीं डस पाया! कुछ देर सोचने के बाद मैंने उन्हें दिलासा देते हुए कहा, ‘ये ऐसे ही थोड़े हो जाएगा प्रभु! आप युगों से हमारे मन में राज कर उन जैसों की, सबकी मौज कराते रहे हो! वे कौन होते हैं आपको भगवान के पद से हटाने वाले। वे पद से हटा भी दें तो उनकी तरह पद से हटना मत। पद से चिपके रहना हमारी परंपरा है। भगवान को भक्तों के सिवाय उनके पद से और कोई नहीं हटा सकता। इसलिए अपना मन छोटा करो प्रभु!’
‘पर वे भी तो अथॉरिटी हैं। आओ, आज जी भर के गले लग लो! क्या पता कल हो हो!’ कहकर वे मेरे गले ऐसे लगे कि.... कमबख्त अंतिम बार गले लगे जिगरी दोस्त की याद हरी कर गए!