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Laugh Out Loud : क्यूट भूत प्लीज...!

7 वर्ष पहले
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'क्रीचर' फिल्म देखने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि भूत एसोसिएशन को विक्रम भट्ट की सदस्यता रद्द कर देनी चाहिए। भूतों पर इतनी फिल्में बनाने के बाद, भूतों से इतना कमाने-खाने के बाद विक्रम भट्ट ने ब्रह्मराक्षस उर्फ एक वरिष्ठ भूत की ऐसी तस्वीर पेश की है कि कोई शर्मदार भूत आत्महत्या तक करने को आतुर हो उठे।
'क्रीचर' फिल्म में ब्रह्मराक्षस इतना खराब दिखाया गया है कि भूतों से मेरा यकीन उठ गया है। कैसे-कैसे सुंदर क्यूट भूतों की परंपरा रही है फिल्मों में। कुछ समय पहले आमिर खान की एक फिल्म आई थी 'तलाश'। इसमें करीना कपूर भूत थीं, या भूतनी भी कह सकते हैं। मुझे नहीं पता कि भूतों में जेंडर डिफरेंस होता है या नहीं। मेरे मन में गुलजार साहब की पुरानी फिल्म 'लेकिन' की भूत (भूतनी) डिंपल कपाड़िया की अमिट छाप है। एकदम ग्रेसफुल भूतनी, बिल्कुल शास्त्रीय अंदाज में गाना गाते हुए (ये गीत लता मंगेशकरजी ने गाए थे)। ये होते थे भूत शास्त्रीय टेस्टवाले। ये 'क्रीचर' फिल्म का ब्रह्मराक्षस फैली हुई छिपकली और सिकुड़े हुए डायनासोर के बीच कुछ लग रहा है। राक्षस का तो एक भी एलीमेंट नहीं है 'क्रीचर' में।
सभी जगह पतन हुआ है, क्या इंसान, क्या भूत। सब जगह स्टैंडर्ड गिर गए हैं। सत्तर के दशक में भूत हेमा मालिनी जैसा होता था (नौजवान अपने किसी अंकल से पूछ लें, 'महबूबा' फिल्म में ऐसा हुआ था)। ऐसा भूत जिसकी सारी हरकतें हेमा मालिनी की तरह, एक भी भुतहा हरकत नहीं, सो ग्रेसफुल भूत।
नब्बे के दशक में रामगोपाल वर्मा ने बहुत भूत-गर्दी मचाई। उनकी एक फिल्म में भूत उर्मिला मातोंडकर की शक्ल में था। पर यहां भूतों के स्टैंडर्ड में पतन दिखने लग गया था। उर्मिला मातोंडकर कई बार भुतही हरकतें करने लगती थीं। फिर भूत सुधरे थे और 'लेकिन' तथा 'तलाश' जैसी फिल्मों में बहुत ग्रेसफुल एवं शास्त्रीय टेस्ट वाले भूत दिखे।
सवाल यह है कि भूत, भूत जैसा क्यों दिखे, जब इस मुल्क में कुछ वैसा नहीं दिखता, जैसा उसे दिखना चाहिए। नेता, नेता नहीं, चोर दिखता है। पुलिसवाले, पुलिसवाले नहीं, हफ्ताखोर-उचक्के दिखते हैं। संन्यासी, संन्यासी नहीं, च्यवनप्राश के सेल्समैन दिखते हैं। डॉक्टर, डॉक्टर नहीं, लाश-नोचू कारोबारी दिखते हैं। वकील, वकील नहीं, न्याय के वे सेल्समैन लगते हैं, जो ईएमआई में न्याय की सेल लगाते हैं।
इस मुल्क में कुछ भी वो नहीं दिख रहा है, जैसा उसे दिखना चाहिए।
तो भूत ही भूत की तरह भयानक क्यों दिखे, इसी आधार पर भूत एसोसिएशन से विक्रम भट्ट की सदस्यता रद्द होनी चाहिए।
भट्ट साहब, बतौर आम आदमी हम तो पहले ही जाने कितने डरे बैठे हैं, आप तो कुछ क्यूट, ग्रेसफुल भूत दिखाओ, प्लीज।
यहभी -
चीनीराष्ट्रपति का परिचय तमाम मुलाकातों-बैठकों में मोदी यह कह कर दे रहे हैं कि यह शी जिनपिंग हैं, चीन से हैं, पर एकदम ओरिजनल हैं, सचमुच के चीनी राष्ट्रपति।
इस सम्मान से आह्लादित होकर चीनी राष्ट्रपति ने मोदी के सामने ही पाकिस्तानी पीएम को फोन करके डांटा - तुम पाक के बदमाशो, डुप्लीकेट नोट इंडिया में भेज रहे हो। हमारे सच्चे दोस्त की तरह तुम याद रखो, इंडिया में कुछ भी डुप्लीकेट चलाने का हक सिर्फ और सिर्फ चीन का है।
आलोक पुराणिक
(लेखकजाने-माने व्यंग्यकार हैं)