खरगोश की मौत
मेवालाल ने देखा कि उनका कुत्ता पड़ोस के मंगलदास का खरगोश मुंह में दबाए चला आ रहा है। उन्होंने बड़ी मुश्किल से कुत्ते के मुंह से खरगोश निकाला और देखा कि वह मर चुका है। उन्होंने सोचा कि पड़ोसी मंगलदास को पता चल गया कि उनके कुत्ते ने उसके खरगोश को मार दिया तो बवाल हो जाएगा। इसलिए मेवालाल ने खरगोश को नहलाया, उसके बाल संवारे ताकि कुत्ते के दांतों के निशान ना दिखें और उसे नजरें बचाकर पड़ोसी के पिंजरे में रख आए। कुछ दिन बाद मेवालाल को मंगलदास मिला तो उसने बताया कि उसका खरगोश मर गया। मेवालाल ने अनजान बनते हुए पूछा, ‘ओह, कैसे? कब? क्या हो गया था?’ मंगलदास ने बताया, ‘खरगोश ने एक दिन अचानक खाना-पीना बंद कर दिया और फिर अगले दिन मर गया।’ मेवालाल ने अफसोस जताया। मंगलदास आगे बोला, ‘लेकिन फिर एक अजीब बात हुई। हमने मरने के बाद खरगोश को बगीचे में दफना दिया था लेकिन कोई बेवकूफ उसे निकालकर, नहला- धुलाकर फिर से पिंजरे में रख गया!’