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भारत के सात सबसे बड़े सस्पेंस, राज खुला तो देश हो जाएगा मालामाल

भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। इसके हर इलाके का इतिहास चौंकाने वाला है।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 04:49 PM IST

स्पेशल डेस्क. भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। इसके हर इलाके का इतिहास चौंकाने वाला है। कभी इसे सोने की चिड़िया कहा गया तो कभी कहा गया कि यहां के लोग हजारों साल पहले विमान उड़ाते थे और एटम बम से खतरनाक ब्रह्मास्त्र चलाते थे। अब ये सिर्फ किस्से कहानियां हैं या इनका कभी सबूत मिलेगा, कह नहीं सकते। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं इंडिया से जुड़े सात सस्पेंस, जिनका खुलासा आजतक नहीं हो पाया हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखें, इंडिया के 7 सस्पेंस...

केरल के श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने खुलते गए और किलोटन में सोना निकलता गया। केरल के श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने खुलते गए और किलोटन में सोना निकलता गया।

श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने में क्या है?


कई दीवारों के पीछे एक तहखाना। तहखाने में हजारों साल पुराना खजाना। न जाने कितने अरबों का खजाना। ये सब आपको इंडियाना जोन्स की किसी फिल्म का सीन लग रहा होगा..लेकिन ये सच है। अपने इंडिया का सच। सच के बाद अब मान्यता भी सुन लीजिए। अगर उस तहखाने को खोला गया तो विनाश होगा। जो इसे खोलेगा वो मरेगा। देश और दुनिया में भी तबाही मच सकती है। जहरीले सांप उसकी रक्षा करते हैं। ये तहखाना है केरल के श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर में। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर के पांच तहखाने खोले जा चुके हैं। इनसे 22 अरब डॉलर का खजाना मिला। जैसे ही छठे तहखाने को खोलने की कोशिश की गई, मंदिर की व्यवस्था देखने वाले त्रावणकोर राज परिवार ने आपत्ति जता दी। परिवार का कहना है ऐसा किया तो विनाश होगा। इस तहखाने का सच क्या कभी सामने आ पाएगा? फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

गुफा में रहने वाले इस बाबा ने 75 साल से कुछ नहीं खाया है। गुफा में रहने वाले इस बाबा ने 75 साल से कुछ नहीं खाया है।

75 साल से बिना खाए कैसे जिंदा है ये साधु?

 

प्रहलाद जानी नाम के इस साधु ने 75 साल से कुछ नहीं खाया है। फिर भी फिट हैं। बाबा की उम्र फिलहाल 85 वर्ष है। बाबा जानी गुजरात के अंबाजी मंदिर के पास एक गुफा में रहते हैं। प्रहलाद जानी का कहना है कि जब वे 12 साल के थे तो देवी जैसी तीन कन्याएं उनके पास आईं और प्रहलाद की जीभ पर उंगली रखी। इसके बाद से ही आज तक न तो भूख लगी और न ही प्यास। प्रहलाद जानी जंगलों में 100-200 किलोमीटर पैदल ही सैर को निकल जाते हैं और वहां 12 घंटों तक ध्यान करते हैं। अलग-अलग समय में दो बार डॉक्टर्स की टीमों ने बाबा की जांच की, लेकिन दोनों ही बार डॉक्टरों के हाथ कुछ नहीं लगा। 2010 में भी साधु प्रहलाद जानी के उनके ऊपर 3 कैमरे लगाए और 24 घंटे निगरानी रखी गई, लेकिन इसमें कुछ भी संदेहास्पद नहीं पाया गया। बाबा जानी की कहानी विज्ञान के लिए एक चुनौती ही है। 

अशोक सम्राट की इस सीक्रेट सोसायटी का काम उस दौर की विज्ञान की खोजों को छिपाना था। अशोक सम्राट की इस सीक्रेट सोसायटी का काम उस दौर की विज्ञान की खोजों को छिपाना था।

क्या आज भी है सम्राट अशोक की सीक्रेट सोसाइटी?


इस सोसाइटी में नौ लोग हैं। हर शख्स के पास एक किताब है। हर किताब में एक विज्ञान। इन किताबों में जैविक हथियार, सिर्फ छूकर मार देने की कला, किसी भी मेटल से गोल्ड बनाने की तकनीक जैसे राज हैं। कहा जाता है कि कलिंग युद्ध में हिंसा से परेशान सम्राट अशोक ने न सिर्फ खुद शांति का रास्ता अपनाया बल्कि उस समय तक जमा तमाम साइंस को छिपा दिया। उन्हें डर था कि आगे भी इनका इस्तेमाल मानवता के खिलाफ किया जा सकता है। उन्होंने नौ लोगों की एक टीम बनाई और सारी जानकारी छिपाकर रखने की जिम्मेदारी इन्हें दी। कहा जाता है कि उन नौ लोगों ने अगली पीढ़ी के नौ और लोगों को सारी जानकारी और इन्हें सेफ करने की जिम्मेदारी दी। ये सिलसिला आज भी जारी है। तो क्या ये सीक्रेट सोसाइटी आज भी हमारे बीच हैं...या फिर ये सिर्फ किस्सा है। 

बिहार के राजगीर में मौजूद इस  गुफा में उन्हें बहुत बड़ा खजाना मिलने की उम्मीद थी। बिहार के राजगीर में मौजूद इस गुफा में उन्हें बहुत बड़ा खजाना मिलने की उम्मीद थी।

सोन भंडार गुफा का खजाना मिलेगा?


इस गुफा को तोप से उड़ाकर तोड़ने की कोशिश की गई। आज भी गुफा पर गोलों के निशान हैं...ये कोशिश अंग्रेजों ने की थी। लेकिन वो नाकाम रहे। बिहार के राजगीर में मौजूद इस  गुफा में उन्हें बहुत बड़ा खजाना मिलने की उम्मीद थी। मान्यता भी यही है कि यहां मौर्य साम्राज्य के शासक बिम्बसार का सोने का खजाना है। गुफा की दीवार पर शंख लिपि में कुछ लिखा है। माना जाता है कि इसमें खजाने का दरवाजा खोलने का तरीका लिखा है। लेकिन आजतक इसे कोई पढ़ नहीं पाया। क्या कभी इसको कोई पढ़ पाएगा?..और क्या कभी इस गुफा को खोला जा सकेगा? क्या वाकई यहां खजाना मिलेगा?

गांव का इतिहास जितना हिला देना वाला है उसका वर्तमान उतने ही रहस्यों से भरा है। गांव का इतिहास जितना हिला देना वाला है उसका वर्तमान उतने ही रहस्यों से भरा है।

क्या है 200 सालों से वीरान इस गांव का राज?


600 से अधिक घर। एक मंदिर, एक दर्जन कुएं, एक बावड़ी, चार तालाब और आधा दर्जन छतरियां। बावजूद इसके करीब 200 सालों से ये गांव वीरान है। नाम है कुलधरा। कुलधरा राजस्थान के जैसलमेर में है। गांव का इतिहास जितना हिला देना वाला है उसका वर्तमान उतने ही रहस्यों से भरा है। कहते हैं यहां पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। जैसलमेर रियासत के दीवान सालिम सिंह के जुल्मों से पालीवाल परेशान थे। हद तो तब हो गई जब सालिम सिंह ने गांव की एक लड़की से ब्याह करने की जिद छेड़ दी, जबकि उसकी पहले से ही सात बीवियां थी। सालिम सिंह ने पालिवालों को एक दिन की मोहलत दी थी। अपने सम्मान की रक्षा करने के लिए पालीवालों ने रात में पंचायत बुलाई और कुलधरा समेत सभी 83 गांवों से पलायन करने का फैसला किया। आने वाले दो सौ सालों में बाकी के गांव तो बस गए लेकिन कुलधरा और खाबा गांव वीरान ही रहे। लोग आज यहां दिन में भी जाने से डरते हैं..कहते हैं यहां कभी कोई आवाज़ सुनाई पड़ती है तो कभी किसी की परछाई नजर आती है...क्या वाकई आज भी इस गांव में पालीवालों की आत्मा है। 

अगर वाकई यहां श्रीकृष्ण की नगरी थी तो यहां अकूत खजाना होना चाहिए। सवाल ये भी है कि श्रीकृष्ण की नगरी समुद्र में कैसे समा गई। अगर वाकई यहां श्रीकृष्ण की नगरी थी तो यहां अकूत खजाना होना चाहिए। सवाल ये भी है कि श्रीकृष्ण की नगरी समुद्र में कैसे समा गई।

क्या समुद्र के नीचे है एक पूरा शहर?


समुद्र के अंदर समा गई एक पूरी नगरी। अवशेष लगातार मिल रहे हैं लेकिन पूरी नगरी नहीं मिली। हम बात कर रहे हैं श्रीकृष्ण की बसाई द्वारिका नगरी की। 1988 से समुद्र के नीचे खोजों का सिलसिला जारी है। अब तक यहां एक नगर होने के 250 सबूत मिल चुके हैं..इन चीजों की कार्बन डेटिंग से पता चलता है कि ये चीजें करीब दस हजार साल पुरानी हैं....कार्बन डे़टिंग तकनीक से पुरानी चीजों की उम्र का पता लगाया जाता है।  अगर वाकई यहां श्रीकृष्ण की नगरी थी तो यहां अकूत खजाना होना चाहिए। सवाल ये भी है कि श्रीकृष्ण की नगरी समुद्र में कैसे समा गई। क्या कोई सुनामी आई या कोई और प्रलय। मान्यताओं के मुताबिक एक शाप के कारण श्रीकृष्ण की नगरी बर्बाद हुई। क्या कभी इस नगरी का खुलासा हो पाएगा?

असम का एक गांव - जातिंगा...क्या यहां  पक्षी आत्महत्या करने आते हैं? असम का एक गांव - जातिंगा...क्या यहां पक्षी आत्महत्या करने आते हैं?

यहां आत्महत्या करने आते हैं पक्षी?


गुवाहाटी से 330 किमी दूर। असम का एक गांव - जातिंगा...क्या यहां  पक्षी आत्महत्या करने आते हैं? ज्यादातर लोगों का ऐसा ही मानना है। कहा जाता है कि जैसे ही पक्षी किसी रोशनी को देखते हैं एक साथ आकर उसपर गिरने लगते हैं..कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि दरअसल जतिंगा एक घाटी है जहां फनल इफेक्ट पैदा होता है..यानी हवा की स्पीड कम होने के कारण पक्षी ठीक से उड़ नहीं पाते और दीवारों से टकराकर मर जाते हैं..कुछ वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दरअसल पक्षियों का शिकार किया जाता है। कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि दरअसल यहां बारिश खूब होती है। हवा में काफी नमी बनी रहती है इसलिए पक्षी उड़ नहीं पाते हैं और गिरकर मर जाते हैं..लेकिन कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि पक्षियों और जानवरों के बर्ताव को अभी हम पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।