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7 रहस्यमय डेड बॉडी जो सालों से नहीं हुईं खराब, एक है 2100 साल से सुरक्षित

आपको जानकर हैरानी होगी कि एक ऐसी डेड बॉडी भी है जो करीब 2100 सालों से सुरक्षित है।

Dainik Bhaskar

Mar 27, 2018, 05:39 PM IST
लेडी जिन सूई की ममी। लेडी जिन सूई की ममी।

हम जानते हैं कि मौत के बाद बेजान शरीर तेजी से खराब होने लगता है, लेकिन दुनियाभर में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां इंसानी शरीर कुछ सालों तक नहीं बल्कि हजारों साल तक वैसे ही रहे। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक ऐसी डेड बॉडी भी है जो करीब 2100 सालों से सुरक्षित है। आज हम आपको बता रहे हैं ऐसी 7 डेड बॉडी के बारे में जिनके ऊपर सालों से कोई फर्क नहीं पड़ा। 2100 साल से सुरक्षित है इस रानी की बॉडी...

लेडी जिन सूई की बॉडी को दुनिया की सबसे सुरक्षित ममी माना जाता है। लेडी जिन सूई हान राजवंश के एक राजनीतिज्ञ की पत्नी थीं। उनकी मौत 163 ईसा पूर्व हुई थी। 2000 साल बाद 1972 में जब लेडी जिन सूई के मकबरे को खोदा गया तो बॉडी बेहद सुरक्षित मिली और नसों में खून अवशेष भी मिले। साइंटिस्ट्स ने अनुमान लगाया कि उनकी मौत हार्ट की बीमारी से हुई होगी।

आगे की स्लाइड्स में देखें, ऐसी ही 7 और डेड बॉडीज के बारे में...

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इटली के बैसिलिका डि सैन फ्रेडिआनो में सेंट जीटा की बॉडी भी किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वे एक कैथोलिक संत थीं और जरूरतमंदों की देखभाल करती थीं। लोगों ने दावा किया कि 1272 में जब सेंट जीटा की मौत हुई थी तो उनके घर के ऊपर एक तारा (स्टार) दिखाई दिया था। 1580 में उनकी बॉडी को खोदकर निकाला गया तो यह सुरक्षित हालत में मिली। जीटा को 1696 में संत घोषित किया गया था। इटली के बैसिलिका डि सैन फ्रेडिआनो में सेंट जीटा की बॉडी भी किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वे एक कैथोलिक संत थीं और जरूरतमंदों की देखभाल करती थीं। लोगों ने दावा किया कि 1272 में जब सेंट जीटा की मौत हुई थी तो उनके घर के ऊपर एक तारा (स्टार) दिखाई दिया था। 1580 में उनकी बॉडी को खोदकर निकाला गया तो यह सुरक्षित हालत में मिली। जीटा को 1696 में संत घोषित किया गया था।
1846 में अंग्रेज ऑफिसर जॉन टोरिंगटन नॉर्थवेस्ट पैसेज की रिसर्च में लगे थे। इस दौरान उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी उम्र 22 साल की थी। मौत के बाद उनकी इस बॉडी को कनाडा में आर्कटिक के बैरन टुंड्रा में दफना दिया गया था। 1984 में टोरिंगटन की कब्र को शिफ्ट करने के लिए खोदा गया तो सभी लोग हैरान रह गए। टोरिंगटन की डेड बॉडी तक ज्यों की त्यों रखी हुई थी। 1846 में अंग्रेज ऑफिसर जॉन टोरिंगटन नॉर्थवेस्ट पैसेज की रिसर्च में लगे थे। इस दौरान उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी उम्र 22 साल की थी। मौत के बाद उनकी इस बॉडी को कनाडा में आर्कटिक के बैरन टुंड्रा में दफना दिया गया था। 1984 में टोरिंगटन की कब्र को शिफ्ट करने के लिए खोदा गया तो सभी लोग हैरान रह गए। टोरिंगटन की डेड बॉडी तक ज्यों की त्यों रखी हुई थी।
दक्षिणी अमेरिका में एंडीज पर्वत की एक ऊंची जगह पर एक 500 साल पुरानी डेड बॉडी मिली थी। बताया जाता है कि यहां एक महिला की बलि दी गई थी जो बर्फ में जमे रहने से सुरक्षित रही। दक्षिणी अमेरिका में एंडीज पर्वत की एक ऊंची जगह पर एक 500 साल पुरानी डेड बॉडी मिली थी। बताया जाता है कि यहां एक महिला की बलि दी गई थी जो बर्फ में जमे रहने से सुरक्षित रही।
डोरजहो इटिगिलोव एक बौद्ध भिक्षु थे। 1927 में ध्यान करते हुए ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे। उनकी डेड बॉडी को ठीक इसी पोजिशन में जमीन में दफना दिया गया था। 1955 में इटिगिलोव के अनुयायियों ने उनकी समाधि स्थल को खोला तो बॉडी ध्यान करने की पोजिशन में ज्यों की त्यों थी। यह देखकर लोग हैरान हो गए। इसके बाद इस बॉडी को इटिगेल खाम्बयन पैलेस टेम्पल में रखवा दिया गया। डोरजहो इटिगिलोव एक बौद्ध भिक्षु थे। 1927 में ध्यान करते हुए ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे। उनकी डेड बॉडी को ठीक इसी पोजिशन में जमीन में दफना दिया गया था। 1955 में इटिगिलोव के अनुयायियों ने उनकी समाधि स्थल को खोला तो बॉडी ध्यान करने की पोजिशन में ज्यों की त्यों थी। यह देखकर लोग हैरान हो गए। इसके बाद इस बॉडी को इटिगेल खाम्बयन पैलेस टेम्पल में रखवा दिया गया।
सिसली की राजधानी पालेर्मो में दो साल की बच्ची रोसालिआ लोम्बार्डो की डेड बॉडी रखी हुई है। लोम्बार्डो की मौत 1920 में हुई थी। इसके बाद उसके पिता ने एक्सपर्ट्स की मदद से अपनी बेटी की बॉडी को सुरक्षित रखने का फैसला किया । एक्सपर्ट ने बॉडी को सुरक्षित रखने के लिए अल्कोहल, सैलीसाइलिक एसिड और ग्लिसरीन के मिश्रण से ऐसा केमिकल तैयार किया, जिससे यह बॉडी आज भी सुरक्षित रखी हुई है। सिसली की राजधानी पालेर्मो में दो साल की बच्ची रोसालिआ लोम्बार्डो की डेड बॉडी रखी हुई है। लोम्बार्डो की मौत 1920 में हुई थी। इसके बाद उसके पिता ने एक्सपर्ट्स की मदद से अपनी बेटी की बॉडी को सुरक्षित रखने का फैसला किया । एक्सपर्ट ने बॉडी को सुरक्षित रखने के लिए अल्कोहल, सैलीसाइलिक एसिड और ग्लिसरीन के मिश्रण से ऐसा केमिकल तैयार किया, जिससे यह बॉडी आज भी सुरक्षित रखी हुई है।
सोवियत संघ के नेता व्लादीमीर लेनिन की मौत 1924 में हुई थी। सोवियत सरकार आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनकी बॉडी को सुरक्षित रखना चाहता थी। आज भी इसे सुरक्षित रखने के लिए बॉडी को केमिकल से नहलाया जाता है और इंजेक्शन लगाए जाते हैं। आज भी लेनिन की बॉडी ऐसे लगती है, जैसे वो जीवित हों। सोवियत संघ के नेता व्लादीमीर लेनिन की मौत 1924 में हुई थी। सोवियत सरकार आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनकी बॉडी को सुरक्षित रखना चाहता थी। आज भी इसे सुरक्षित रखने के लिए बॉडी को केमिकल से नहलाया जाता है और इंजेक्शन लगाए जाते हैं। आज भी लेनिन की बॉडी ऐसे लगती है, जैसे वो जीवित हों।
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लेडी जिन सूई की ममी।लेडी जिन सूई की ममी।
इटली के बैसिलिका डि सैन फ्रेडिआनो में सेंट जीटा की बॉडी भी किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वे एक कैथोलिक संत थीं और जरूरतमंदों की देखभाल करती थीं। लोगों ने दावा किया कि 1272 में जब सेंट जीटा की मौत हुई थी तो उनके घर के ऊपर एक तारा (स्टार) दिखाई दिया था। 1580 में उनकी बॉडी को खोदकर निकाला गया तो यह सुरक्षित हालत में मिली। जीटा को 1696 में संत घोषित किया गया था।इटली के बैसिलिका डि सैन फ्रेडिआनो में सेंट जीटा की बॉडी भी किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वे एक कैथोलिक संत थीं और जरूरतमंदों की देखभाल करती थीं। लोगों ने दावा किया कि 1272 में जब सेंट जीटा की मौत हुई थी तो उनके घर के ऊपर एक तारा (स्टार) दिखाई दिया था। 1580 में उनकी बॉडी को खोदकर निकाला गया तो यह सुरक्षित हालत में मिली। जीटा को 1696 में संत घोषित किया गया था।
1846 में अंग्रेज ऑफिसर जॉन टोरिंगटन नॉर्थवेस्ट पैसेज की रिसर्च में लगे थे। इस दौरान उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी उम्र 22 साल की थी। मौत के बाद उनकी इस बॉडी को कनाडा में आर्कटिक के बैरन टुंड्रा में दफना दिया गया था। 1984 में टोरिंगटन की कब्र को शिफ्ट करने के लिए खोदा गया तो सभी लोग हैरान रह गए। टोरिंगटन की डेड बॉडी तक ज्यों की त्यों रखी हुई थी।1846 में अंग्रेज ऑफिसर जॉन टोरिंगटन नॉर्थवेस्ट पैसेज की रिसर्च में लगे थे। इस दौरान उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी उम्र 22 साल की थी। मौत के बाद उनकी इस बॉडी को कनाडा में आर्कटिक के बैरन टुंड्रा में दफना दिया गया था। 1984 में टोरिंगटन की कब्र को शिफ्ट करने के लिए खोदा गया तो सभी लोग हैरान रह गए। टोरिंगटन की डेड बॉडी तक ज्यों की त्यों रखी हुई थी।
दक्षिणी अमेरिका में एंडीज पर्वत की एक ऊंची जगह पर एक 500 साल पुरानी डेड बॉडी मिली थी। बताया जाता है कि यहां एक महिला की बलि दी गई थी जो बर्फ में जमे रहने से सुरक्षित रही।दक्षिणी अमेरिका में एंडीज पर्वत की एक ऊंची जगह पर एक 500 साल पुरानी डेड बॉडी मिली थी। बताया जाता है कि यहां एक महिला की बलि दी गई थी जो बर्फ में जमे रहने से सुरक्षित रही।
डोरजहो इटिगिलोव एक बौद्ध भिक्षु थे। 1927 में ध्यान करते हुए ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे। उनकी डेड बॉडी को ठीक इसी पोजिशन में जमीन में दफना दिया गया था। 1955 में इटिगिलोव के अनुयायियों ने उनकी समाधि स्थल को खोला तो बॉडी ध्यान करने की पोजिशन में ज्यों की त्यों थी। यह देखकर लोग हैरान हो गए। इसके बाद इस बॉडी को इटिगेल खाम्बयन पैलेस टेम्पल में रखवा दिया गया।डोरजहो इटिगिलोव एक बौद्ध भिक्षु थे। 1927 में ध्यान करते हुए ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे। उनकी डेड बॉडी को ठीक इसी पोजिशन में जमीन में दफना दिया गया था। 1955 में इटिगिलोव के अनुयायियों ने उनकी समाधि स्थल को खोला तो बॉडी ध्यान करने की पोजिशन में ज्यों की त्यों थी। यह देखकर लोग हैरान हो गए। इसके बाद इस बॉडी को इटिगेल खाम्बयन पैलेस टेम्पल में रखवा दिया गया।
सिसली की राजधानी पालेर्मो में दो साल की बच्ची रोसालिआ लोम्बार्डो की डेड बॉडी रखी हुई है। लोम्बार्डो की मौत 1920 में हुई थी। इसके बाद उसके पिता ने एक्सपर्ट्स की मदद से अपनी बेटी की बॉडी को सुरक्षित रखने का फैसला किया । एक्सपर्ट ने बॉडी को सुरक्षित रखने के लिए अल्कोहल, सैलीसाइलिक एसिड और ग्लिसरीन के मिश्रण से ऐसा केमिकल तैयार किया, जिससे यह बॉडी आज भी सुरक्षित रखी हुई है।सिसली की राजधानी पालेर्मो में दो साल की बच्ची रोसालिआ लोम्बार्डो की डेड बॉडी रखी हुई है। लोम्बार्डो की मौत 1920 में हुई थी। इसके बाद उसके पिता ने एक्सपर्ट्स की मदद से अपनी बेटी की बॉडी को सुरक्षित रखने का फैसला किया । एक्सपर्ट ने बॉडी को सुरक्षित रखने के लिए अल्कोहल, सैलीसाइलिक एसिड और ग्लिसरीन के मिश्रण से ऐसा केमिकल तैयार किया, जिससे यह बॉडी आज भी सुरक्षित रखी हुई है।
सोवियत संघ के नेता व्लादीमीर लेनिन की मौत 1924 में हुई थी। सोवियत सरकार आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनकी बॉडी को सुरक्षित रखना चाहता थी। आज भी इसे सुरक्षित रखने के लिए बॉडी को केमिकल से नहलाया जाता है और इंजेक्शन लगाए जाते हैं। आज भी लेनिन की बॉडी ऐसे लगती है, जैसे वो जीवित हों।सोवियत संघ के नेता व्लादीमीर लेनिन की मौत 1924 में हुई थी। सोवियत सरकार आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनकी बॉडी को सुरक्षित रखना चाहता थी। आज भी इसे सुरक्षित रखने के लिए बॉडी को केमिकल से नहलाया जाता है और इंजेक्शन लगाए जाते हैं। आज भी लेनिन की बॉडी ऐसे लगती है, जैसे वो जीवित हों।
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