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दिव्यांग बेटे को रोज कंधे पर बैठाकर कॉलेज ले जाते हैं पिता

बेटे को कलेक्टर बनाना चाहता हैं कालू सिंह

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 16, 2018, 07:50 PM IST

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    कालू सिंह के जज्बे को सलाम

    स्पेशल डेस्क: कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान गरीब हो या अमीर, उसके आगे मुश्किलें कुछ भी नहीं है। GOOD NEWS में बात ऐसे ही शख्स की। वो खुद अनपढ़ है लेकिन बेटे को कलेक्टर बनाना चाहता है। बेटा दिव्यांग है...तो क्या हुआ, जुनून ऐसा कि पिता रोज उसे कंधे पर लादकर कॉलेज लेकर जाता है, और वापस लेकर आता है। इकलौता बेटा है जगदीश...

    2017 में लिया कॉलेज में एडमिशन
    मध्य प्रदेश के राजगढ़ इलाके में दौलतपुरा के रहने वाले कालूसिंह सोंधिया का इकलौता बेटा जगदीश शारीरिक रूप से दिव्यांग है। कालू सिंह तो अनपढ़ हैं, लेकिन अपने बेटे को पढ़ाने के लिए वे उसे अपनी गोद में लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चलते हैं। कुदरत ने भी जगदीश का शरीर ऐसा बनाया कि वो ट्राइसाइकिल भी नहीं चला सकता। कालू सिंह चाहते हैं कि उनका बेटा पढ़ लिखकर बहुत बड़ा अफसर बने। जगदीश का कद सिर्फ 3 फीट ही है। उसके हाथ पैर भी सही तरीके से काम नहीं करते हैं। इसलिए कालू सिंह जगदीश को कंधे पर बैठाकर उसे कॉलेज ले जाते हैं। जगदीश के गांव के आस पास कोई कॉलेज भी नहीं है। उसे स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। उसने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से 10 किलोमीटर दूर संडावता से की। 2016 में हायर सेकंडरी पास करने के बाद 2017 में उसने अपने गांव से 25 किमी दूर राजगढ़ के कॉलेज में एडमिशन लिया। पिता कालू सिंह जगदीश के साथ कॉलेज जाते हैं और उसकी छुट्टी होने तक वहीं रुकते भी हैं।

    IAS बनने का है सपना
    20 साल के जगदीश का सपना हैं कि वो बड़े होकर आईएएस अफसर बने। किसी भी बेटे के लिए यह गर्व की बात होगी कि उसके बाप के कंधे ही उसका सहारा हैं।

    सरकार से नहीं मिली मदद
    कालू सिंह ने बताया कि उन्होंने सरकार और प्रशासन से मदद के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। प्रशासन ने सिर्फ 50 फीसदी विकलांगता का प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया है। जिसके भरोसे रहने का कोई मतलब नहीं है।

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    अब तो मिल जाए सरकार से मदद
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Web Title: Hero Dad Helps Disabled Son
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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