--Advertisement--

क्या कुतुब मीनार पहले एक मंदिर था, सामने आती हैं ये पांच वजहें

कुतुब मीनार और कुतुब कॉम्पलेक्स में बनी दूसरी बिल्डिंग्स को देखकर इसके शुरू से इस्लामिक होने पर सवाल उठते हैं।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 04:30 PM IST

हटके डेस्क. विश्व की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है कुतुब मीनार। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। इसके आस-पास के परिसर को कुतुब कॉम्पलेक्स नाम दिया गया है। लेकिन कुतुब मीनार की बनावट और संरचना को लेकर अक्सर विवाद होता रहा है। कहते हैं कि दिल्‍ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे बनवाना शुरू किया लेकिन इसका आधार ही बन पाया। फिर कुतुबुद्दीन के उत्‍तराधिकारी इल्तुतमिश ने इसकी तीन मंजिलें बनाई और 1368 में फिरोजशाह तुगलक ने पांचवीं और अंतिम मंजिल बनवाई थी। लेकिन इस बिल्डिंग के स्ट्रक्चर और कुतुब कॉम्पलेक्स में बनी दूसरी बिल्डिंग्स को देखकर इसके शुरू से इस्लामिक होने पर सवाल उठते हैं। ये स

News Source: ये खबर Phenomenal Travel Videos यूट्यूब चैनल से ली गई है। dainik bhaskar.com इस खबर की पुष्टि नहीं करता है।

आगे की स्लाइड्स में देखें, सवाल उठने की पांच वजहें...

कुतुब कॉम्पलेक्स में हिंदू ढांचे कुतुब कॉम्पलेक्स में हिंदू ढांचे

वजह नंबर 1- कुतुब कॉम्पलेक्स में हिंदू ढांचे क्यों:
कुतुब मीनार को देखने से तो यही लगता है कि यह एक इस्लामिक स्ट्रक्चर है। इसकी दीवारों पर अरबी में कुरान की आयते लिखी  हैं, लेकिन इसके पास में ही एक खंडहर नुमा ढांचा दिखाई देता है। इसके ऊपर एक गुंबद बना हुआ है लेकिन इसके पिलर और उस पर बनी आकृतियां कुछ और ही कहानी कहती हैं। ऐसे पिलर और आकृतियां मंदिरों में बनाए जाते हैं। खंभों पर मंदिर में लगने वाली घंटी बनी है। पास में रखे एक पत्थर में भगवान गणेश की प्रतिमा जैसी आकृति दिखती है....इसे मिटाने की कोशिश की गई लगती है लेकिन ये पूरा मिट नहीं पाया।  पास ही रामायण में जिक्र किए गए युद्ध को दिखाया गया है। तो सवाल ये है कि एक इस्लामिक कॉम्पलेक्स में हिंदू धर्म से जुड़ी चीजें क्यों दिख रही हैं.

 
हिंदू ढांचों के बीच कुतुब मीनार हिंदू ढांचों के बीच कुतुब मीनार

वजह नंबर 2- हिंदू ढांचों के बीच कुतुब मीनार क्यों: अगर मान लें कि  कुतुब मीनार के आसपास के ढांचे हिंदुओं ने बनाए थे तो उन्होंने  कॉम्पलेक्स के ठीक बीच में 50 फीट व्यास की खाली जगह क्यों छोड़ते। क्या इसलिए कि कुतुबुद्दीन यहां आकर कुतुब मीनार का निर्माण कर सकें?

 

वजह नंबर 3- मीनार पर मंदिरों की घंटियां और जंजीरें क्यों:

मान लिया कि आसपास तो हिंदू ढांचे हैं लेकिन कुतुब मीनार इस्लामिक है। तो अब ये जानकर चौंक जाएंगे कि कुतुब मीनार की दीवारों पर भी घंटियां और जंजीर बनी  हुई हैं।  ये घंटियां और जंजीरें इस कॉम्पलेक्स में बनी अधूरी बिल्डिंग के घंटियों और जंजीरों जैसी ही दिखते हैं। घंटी इस्लाम में बैन है। मोहम्मद साहब ने कहा था घंटी शैतान का म्यूजिकल इन्ट्रूमेंट्स है। ऐसे में सवाल उठता है कि कोई मुस्लिम शासक अपने बिल्डर्स से घंटी उकेरने के लिए क्यों कहेगा।   

 

वजह नंबर 4- कुतुब मीनार को बनाने की नहीं मिलती कोई वजह:
कहा जाता है कि कुतुब मीनार को अजान के लिए बनाया गया। अजान के लिए कोई इतनी ऊंची इमारत क्यों बनाएगा जहां चढ़ने में 45 मिनट लग जाएं और नीचे तक आवाज़ भी न जाए। क्योंकि 800 साल पहले तो लाउडस्पीकर भी नहीं थे। एक थ्योरी ये है कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना नाम अमर करने के लिए इस इमारत को बनवाया। अगर ऐसा है तो उसका नाम मुख्य आकर्षण यानी कुतुब मीनार पर क्यों नहीं. जबकि पास ही बनी छोटी सी मस्जिद पर उसका नाम है। 
 

वजह नंबर 5- लाहौर में रहता था कुतुबुद्दीन ऐबक:
कुतुबुद्दीन के बारे में तो यह कहा जाता है कि उसने कुतुब कॉम्पलेक्स और इसके आस-पास कोई भी इमारत नहीं बनवाई है। वो तो लाहौर में रहता था जो यहां से 250 मील की दूरी पर है। कुतुब मीनार के सम्बन्ध में इतिहास में हमें कोई भी दस्तावेज नही मिलता है। 1852 में एक मुस्लिम आर्कलॉजिस्ट सईद अहमद खान ने एक पेपर प्रजेंट किया जिसमें जिक्र किया कि कुतुब मीनार एक हिंदू इमारत है।