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कोहिनूर के साथ ये चीज भी ले गईं थी ब्रिटेन की महारानी, इस वजह से है खास

ब्रिटेन की महारानी अपने साथ कोहिनूर और एक पत्थर लेकर गईं थी। इसे शजर कहा जाता है

Danik Bhaskar | Dec 11, 2017, 05:25 PM IST
क्वीन विक्टोरिया को पसंद आया ये पत्थर जिसे शजर कहा जाता है क्वीन विक्टोरिया को पसंद आया ये पत्थर जिसे शजर कहा जाता है

ब्रिटेन की महारानी क्वीन विक्टोरिया अपने साथ बेशकीमती हीरा कोहिनूर ले गई थी। ये बात तो लोग जानते हैं। लेकिन इस हीरे के अलावा एक चीज और उन्हें इतनी अच्छी लगी जिसे वे अपने साथ ले गई। इस चीज के बारे में कम ही लोगों को पता है। दरअसल ये एक पत्थर था जिसे शजर कहा जाता है।

शजर पत्थर के बारे में कहा जाता है कि ये दो पत्थर कभी एक जैसे नहीं होते हैं। ये पत्थर आज भी अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर हैं। अगर भारत की बात करें तो यह पत्थर बांदा में केन नदी के तट पर पाया जाता है। इसे ज्वेलरी, वाल हैंगिंग और ताजमहल जैसी कलाकृति बनाने में यूज किया जाता है। कैसे हुई इन पत्थरों की खोज?

लगभग 400 साल पहले इसे भारत में अरब से आए लोगों ने पहचाना। इस पत्थर पर उकेरी हुई पेड़, पत्ती की आकृति की वजह से इसे शजर नाम दिया गया। पर्शियन भाषा में शजर नाम का मतलब पेड़ होता है। इसके बाद मुगलों के शासन काल में इस पत्थर से कई कलाकृतियां बनी।

किस काम आता है ये पत्थर

कुछ मुसलमान इन पत्थरों पर कुरान की आयतें लिखवाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस पत्थर का इस्तेमाल बीमारियों के इलाज में किया जाता है। शजर की खासियत को देखते हुए बांदा से ये पत्थर पूरी दुनिया में जाते हैं। खासतौर से ईरान जैसे देशों में इस पत्थर की मांग ज्यादा है।

आगे की स्लाइड्स में देखिए महारानी को पसंद आने वाले इन पत्थर के फोटोज...

दो शजर स्टोन कभी एक जैसे नहीं होते दो शजर स्टोन कभी एक जैसे नहीं होते
शजर स्टोन का यूज ज्वेलरी और कलाकृतियों को बनाने में होता है शजर स्टोन का यूज ज्वेलरी और कलाकृतियों को बनाने में होता है
अलग-अलग साइज और शेप में तराशे जाते हैं ये पत्थर अलग-अलग साइज और शेप में तराशे जाते हैं ये पत्थर
मुगलकाल में इस पत्थर से बनी कलाकृतियों को बढ़ावा दिया गया मुगलकाल में इस पत्थर से बनी कलाकृतियों को बढ़ावा दिया गया
वाल हैंगिग और लॉकेट बनाने के काम आता है ये पत्थर वाल हैंगिग और लॉकेट बनाने के काम आता है ये पत्थर