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ये कैसा ब्यूटी कॉन्टेस्ट: मॉडल्स के चेहरे ही ढक दिए जाते थे, बीते जमाने की हैरान करने वाली ये बातें आप नहीं जानते होंगे

एक दौर वो भी था, जब ब्यूटी कॉन्टेस्ट में चेहरे ढंक दिए जाते थे। आइए आपको ऐसी ही अजीबोगरीब चीजों से रूबरू कराते हैं।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Feb 23, 2018, 07:43 PM IST

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recent past holds so many Absurd and weird Things some of them are even struggle to imagine.
एक दौर ऐसा भी था जब फेसलेस ब्यूटी कॉन्टेस्ट होते थे।

खबर जरा हटके डेस्क. आज आपके हाथ में मोबाइल फोन है। पलक झपकते ही दुनिया के किसी भी हिस्से में बात कर लेते हैं। एक जमाना टेलिग्राम और टेलिफोन बूथ का भी था। कभी सोचा है, उस दौर में लोग कैसे बात करते होंगे या मैसेज पहुंचाते होंगे। बहुत मुश्किल होता होगा ना? 1900 से 1950 का दौर बड़े बदलावों का था। दुनिया के कई हिस्सों में कुछ चीजें बड़ी अजीब थीं। आज रैम्प पर कैटवॉक करती मॉडल्स या ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा ले रहीं कन्टस्टेंट अपनी खूबसूरत चेहरे और मुस्कान का जलवा बिखेरती हैं। लेकिन, जरा सोचिए- एक दौर वो भी था, जब ब्यूटी कॉन्टेस्ट में लड़कियों के चेहरे ढंक दिए जाते थे। आइए आपको कुछ ऐसी ही अजीबोगरीब चीजों से रूबरू कराते हैं। 

 


कवर्ड फेस ब्यूटी कॉन्टेस्ट

- आज के दौर में जब कोई ब्यूटी कॉन्टेस्ट होता है तो कन्टस्टेंट यानी भाग लेने वाली लड़की का चेहरा और पूरा फिगर देखा जाता है। उसकी सामाजिक सोच जानने के लिए कुछ सवाल भी किए जाते हैं। लेकिन, एक दौर ऐसा भी था जब फेसलेस ब्यूटी कॉन्टेस्ट होते थे। 
- इनमें से 1936 का क्लिफटनविले कॉन्टेस्ट तो खासा फेमस था। इसमें कन्टस्टेंट के चेहरे एक ऊंचे पनामा हैट से ढंक दिए जाते थे। सिर्फ फिगर देखकर रिजल्ट दिया जाता था। 

 

मौत के बाद फोटोग्राफी यानी पोस्टमॉर्टम फोटोग्राफी

- कौन नहीं चाहता कि उसके पास अपने करीबियों या रिश्तेदारों के फोटोग्राफ हों। हालांकि, मौत के फौरन बाद के फोटोग्राफ कोई नहीं रखना चाहता। लेकिन, एक दौर वो भी था जब किसी की मौत के फौरन बाद और पोस्टमॉर्टम के पहले डेडबॉडीज के फोटोग्राफ लिए जाते थे। फैमिली मेंबर्स इन्हें सहेज कर अपने पास रखते थे। 

 

प्रेस (ironing) से बाल सीधे करना

- महिलाएं अकसर अपने बाल सीधे करने के लिए हेयर स्ट्रेटनर का इस्तेमाल करती हैं। आज तो तमाम कंपनियां ये हेयर स्ट्रेटनर बनाती हैं। लेकिन, जरा सोचिए आज से कई साल पहले वो बाल सीधे कैसे करती होंगी? सोच में पड़ गए ना?
- चलिए हम बताते हैं। दरअसल, पचास या साठ साल पहले भी महिलाएं हेयर स्ट्रेटनिंग कराया करती थीं। लेकिन, इसका तरीका बड़ा अजीब था। उस दौर में कपड़ों को प्रेस करने वाली मशीन जिसे हिंदी में इस्त्री कहते हैं, का इस्तेमाल बाल सीधे करने के लिए किया जाता था। 
- एक कंघा लेकर बालों को सीधा किया जाता था और फिर उस पर गर्म प्रेस घुमा दी जाती थी। इस तरह बाल सीधे हो जाते थे। 

 

भगवान आपके घर खुद आते थे

- माना तो यही जाता है कि इनसान खुद भगवान के पास जाता है। लेकिन, जैसे आज मोबाइल लैब या मोबाइल मेडिकल वैन मौजूद हैं, वैसे ही पुराने दौर में मोबाइल चर्च भी हुआ करते थे। एक प्रीस्ट गाड़ी में चर्च बनाकर खुद श्रद्धालुओं तक पहुंचता था। ऐसी ही एक तस्वीर 1922 की है, जो आप देख सकते हैं। 

 

वैक्स लैब मॉडल्स

- आपने मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बने लैब देखे होंगे। आज यहां इनसानों के ढांचे होते हैं। एक दौर में यह नामुमकिन हुआ करता था। तब वैक्स यानी मोम के मॉडल्स बनाए जाते थे। स्टूडेंट्स इनके जरिए ही इनसानी शरीर में होने वाली बीमारियों और उनके इलाज का तरीका समझा करते थे। 

 

आत्माओं से बात करने के लिए क्लास

- कुछ लोग जैसे तांत्रिक कई बार दावा करते हैं कि वो आत्माओं से बात कर लेते हैं। यानी जिसकी मौत हो चुकी है, उस शख्स से भी बात कर लेते हैं। साल 1900 के आसपास कुछ देशों में अकसर ऐसी मीटिंग्स होती थीं, जिनके बारे में कहा जाता है कि यहां आत्माओं से बात होती है। यहां लोग अजीबोगरीब कपड़े और मेकअप करके आते और हरकतें भी अजीब सी करते।

 

ब्रेस्ट केयर

- आज से करीब 80 साल पहले ही ब्रेस्ट मसाज और वॉशिंग के एप्रेटस बाजार में आ गए थे। उस दौरान पानी के प्रेशर से ब्रेस्ट मसाज की जाती थी। 

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एक दौर वो भी था जब किसी की मौत के फौरन बाद और पोस्टमॉर्टम के पहले डेडबॉडीज के फोटोग्राफ लिए जाते थे। फैमिली मेंबर्स इन्हें सहेज कर अपने पास रखते थे।
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पचास या साठ साल पहले भी महिलाएं हेयर स्ट्रेटनिंग कराया करती थीं। लेकिन, इसका तरीका बड़ा अजीब था। उस दौर में कपड़ों को प्रेस करने वाली मशीन जिसे हिंदी में इस्त्री कहते हैं, का इस्तेमाल बाल सीधे करने के लिए किया जाता था।
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साल 1900 के आसपास कुछ देशों में अकसर ऐसी मीटिंग्स होती थीं, जिनके बारे में कहा जाता है कि यहां आत्माओं से बात होती है।
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आज से करीब 80 साल पहले ही ब्रेस्ट मसाज और वॉशिंग के एप्रेटस बाजार में आ गए थे।
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एक दौर ऐसा था जब वैक्स यानी मोम के मॉडल्स बनाए जाते थे। स्टूडेंट्स इनके जरिए ही इनसानी शरीर में होने वाली बीमारियों और उनके इलाज का तरीका समझा करते थे।
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पुराने दौर में मोबाइल चर्च भी हुआ करते थे। एक प्रीस्ट गाड़ी में चर्च बनाकर खुद श्रद्धालुओं तक पहुंचता था।
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