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ऐसा भी हो सकता है : मोमबत्ती की तरह पिघल सकता है हमारा शरीर

हमारा शरीर भी मोमबत्ती की तरह पिघल सकता है। क्या ऐसा भी हो सकता है?

dainikbhaskar.com | Last Modified - Dec 16, 2017, 10:15 AM IST

    • क्या आप जानते हैं कि हमारा शरीर भी मोमबत्ती की तरह पिघल सकता है? सुनने में बेहद अजीब लगे पर साइंटिस्ट्स की कई रिसर्च में ऐसे दावे किए जा चुके हैं। दुनिया भर में ऐसी रहस्मय मौतों के 200 से भी ज्यादा मामले आ चुके हैं, जिसमें लोग जलकर मरे लेकिन किसी भी बाहरी तत्व से आग लगने के सबूत नहीं मिले। दावा किया गया कि ये लोग अपने शरीर की गर्मी से ही जलकर मर गए। यहां शरीर ने एक मोमबत्ती की तरह काम किया। क्या कहती है रिसर्च...

      - ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के मुताबिक इसे सच मानने वालों ने इसे Wick थ्योरी नाम दिया। इस थ्योरी के अनुसार ऐसी घटनाओं में इंसानी शरीर एक मोमबत्ती की तरह काम करता है। जिसे (Spontaneous Human Combustion) एसएचसी कहते हैं।

      -थ्योरी के मुताबिक आग की हलकी लपट या किसी और तरीके से पहले ऐसे व्यक्ति की चमड़ी जल जाती है। इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति के शरीर की गर्मी की वजह से बॉडी फैट कपड़ो पर चिपक जाता है और आग बढ़ने के लिए एक और सोर्स बन जाता है।

      - यह एक तरह से ग्रीस या मोम का काम करता है। ऐसे मामले में शरीर के कुछ हिस्से तो जलकर राख हो जाते हैं, तो कई बार हाथ और पैर बच जाते हैं। ऐसी कई मौतों में कुछ ऐसे ही दृश्य सामने आए, जिससे इस थ्योरी को कुछ हद तक बल मिलता है।

      - इसे मानने वाला एक और पक्ष इसे Paranaormal Activity करार देता है, जो इंसानी समझ से परे है।

      कुछ साइंटिस्ट ने माना असंभव

      - Spontaneous Human Combustion यानी अपने ही शरीर की गर्मी से जल जाने की बात को कुछ साइंटिस्ट सिरे से नकार देते हैं। इनकी रिसर्च के मुताबिक एक इंसानी शरीर को जलाने के लिए 700 से 1000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पैदा करनी होती है और शरीर की गर्मी से ऐसा होना असंभव है।

      - हालांकि, अबतक सामने आए मामलों में जलने वाले लोगों के शरीर के कुछ अंग और आसपास की चीजें बिलकुल सुरक्षित पाई गईं थीं। अगर 1000 डिग्री तक गरमी पैदा होती तो आसपास कुछ नहीं बचता।

      - साइंस के लिए अब भी ये एक पहेली की तरह है, पर ध्यान रहे ऐसा भी हो सकता है...

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      ऐसी पहली मौत हुई थी फ्लॉरिडा की Marry Reeser की। 2 जुलाई 1951 को मैरी के घर पर उनके अवशेष मिले थे। उनके पैर के अलावा सबकुछ राख हो चुका था। दावा किया गया था कि वे SHC का शिकार हुई थीं।
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      ऐसी मौत का सबसे ताजा मामला दिसंबर 2010 का है। आयरलैंड के माइकल फेहरटी की मौत को Spontaneous Human Combustion करार दिया गया था। इसके पीछे वजह थी शरीर में आग लगने का कारण पता नहीं चल पाना।
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      मैरी की मौत के बाद 1980 में ऐसी एक और घटना सामने आई, जिसमें साउथ वेल्स के 73 वर्षीय Henry Thomas जलकर राख हो गए थे। हालांकि उनके पैर सही सलामात पाए गए हैनरी उस वक्त सॉक्स भी पहने हुए थे। पुलिस ने यहां Wick Effect थ्यौरी को मौत का कारण माना।
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    Web Title: Aisa Bhi Ho Sakta Hai, Your Own Body May Burn Like A Candle, Be Aware
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