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आखिर भारत में चिकन पॉक्स को क्यों कहा जाता है माता? ये है पीछे की वजह

चूंकि भारतीय भगवान में काफी आस्था रखते हैं, इस कारण चिकन पॉक्स के इलाज को भगवान से ही कनेक्ट कर दिया गया।

Danik Bhaskar

Nov 28, 2017, 01:26 PM IST

हम सभी जानते हैं कि चिकन पॉक्स या खसरा रोग एक से दूसरे में फैलने वाली बीमारी है। इसमें व्यक्ति की बॉडी पर लाल और छोटे दाने होने लगते हैं, जिसमें काफी खुजली होती है। भारत के ज्यादातर इलाकों में इस बीमारी को माताजी कहा जाता है। लेकिन क्या आपको इसका कारण पता है? शरीर में होने वाला इंफेक्शन या माताजी का प्रकोप...


वैसे तो साइंस के लिहाज से ये एक नॉर्मल बीमारी है, जिसमें कुछ प्रिकॉशन लेकर इंसान ठीक हो जाता है। लेकिन इंडिया में लोग इसे माताजी का प्रकोप मान लेते हैं। आज हम आपको इसकी वजह बताने जा रहे हैं वो हर वजह, जिसके पीछे साइंस या लॉजिक छिपा है लेकिन उसे माताजी से जोड़ दिया जाता है। वैसे तो हम सारी चीजों को भगवान की मर्जी से जोड़ते हैं, लेकिन चिकन पॉक्स को खासकर शीतला माता से जोड़ा जाता है। शीतला माता को मां दुर्गा का रूप माना जाता है। ऐसा कहते हैं कि उनकी पूजा करने से चेचक, फोड़े-फूंसी और घाव ठीक हो जाते हैं। दरअसल, शीतला का अर्थ होता है ठंडक। चिकन पॉक्स होने पर बॉडी में काफी इरिटेशन होती है और उस वक्त सिर्फ बॉडी को ठंडक चाहिए होती है। इसलिए कहा जाता है कि शीतला माता की पूजा करने से वो खुश हो जाती हैं, जिससे मरीज की बॉडी को ठंडक पहुंचती है।

क्या वाकई माता का गुस्सा है चिकन पॉक्स?
मान्यताओं के मुताबिक, चिकन पॉक्स उस इंसान को होता है, जिसपर माता का बुरा प्रकोप पड़ता है। ऐसे में इस दौरान उनकी पूजा करने पर माता व्यक्ति की बॉडी में आती है और बीमारी को ठीक कर देती हैं। लोग चिकन पॉक्स का इलाज करवाने की जगह इस दौरान काफी प्रिकॉशन रखते हैं और 6 से 10 दिन में बीमारी के ठीक होने का इंतजार करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, 90 के दशक तक चिकन पॉक्स के इंजेक्शन नहीं मौजूद थे। इस कारण विद्वानों ने इस बीमारी के कुछ घरेलू उपाय बताए थे, जिसे भगवान से जोड़ दिया जाता है।

आगे पढ़ें चिकन पॉक्स और भगवान का लॉजिकल कनेक्शन...

1) दवाइयों के बिना होता है इलाज 1) दवाइयों के बिना होता है इलाज

दरअसल, इस बीमारी के इलाज एक लिए किसी तरह की दवाई है ही नहीं। इसमें सिर्फ आराम के लिए कुछ एंटी वायरल दवाइयां ही दी जाती हैं। 

 

2) मरीज को रखा जाता है अकेला 2) मरीज को रखा जाता है अकेला

 चूंकि, ये हवा से फैलने वाली बीमारी है, इसलिए मरीज को अकेले रखा जाता है और उसके आसपास लोगों को नहीं जाने दिया जाता है। 

3) नीम की पत्तियों पर सोना 3) नीम की पत्तियों पर सोना

नीम को एंटी बैक्टीरियल माना जाता है। इस कारण मरीज को इन पत्तियों पर सुलाया जाता है।  

 

4) बिना तेल-मसाले का खाना 4) बिना तेल-मसाले का खाना

इस दौरान मरीज का लीवर कमजोर हो जाता है। इस कारण तेल मसाले का खाना बंद कर दिया जाता है। 

 

5) नहाना हो जाता है मना 5) नहाना हो जाता है मना

दरअसल, चिकन पॉक्स होने पर तौलिये से स्किन पोछने के कारण इन्फेक्शन बढ़ने के चान्सेस होते हैं। इस कारण नहाना बंद करवा दिया जाता है।  

6) एक बार ही आती है माता 6) एक बार ही आती है माता

इसकी वजह है कि एक बार इंजेक्शन लग जाने के बाद इंसान को दुबारा चिकन पॉक्स नहीं होता। इसे माताजी से जोड़ दिया जाता है। 

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