160 से ज्यादा मसाले डाले जाते थे टुंडे कबाब में, जानिए इसकी पूरी कहानी

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फूड डेस्क। लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह जब बूढ़े हो गए और उन्हें खाना चबाने में मुश्किल होने लगी। तब उन्होंने शाही खानसामे हाजी मुराद अली से मीट की ऐसी वेरायटी बनाने को कहा जिसे चबाने में आसानी हो। तब खानसामे ने मीट के साथ कई मसाले मिक्स करके ऐसे कबाब बनाए जो मुंह में रखते ही घुल जाते थे। लखनऊ के अमीनाबाद में टुंडे कबाबी की विरासत संभाल रहे मुराद के पाेते उस्मान अली ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताई इसकी पूरी दास्तां। क्यों कहा गया टुंडे कबाब?... 
 
 
टूटे हाथ से बनाते थे कबाब...
मुराद अली का एक हाथ टूटा हुआ था। टूटे हाथ को टुंडा कहते हैं। इसलिए ये कबाब टुंडे कबाब कहे जाने लगे। शाही खानसामे इसे बनाने में 160 से ज्यादा मसालों का यूज करते थे। इन मसालों को अलग-अलग दुकानों से खरीदा जाता था ताकि शाही खानसामे के अलावा कोई और कबाब बनाना न सीख सके। इसे गलौटी कबाब के नाम से भी जाना जाता है। गौरतलब है कि मुराद अली के पूर्वज भोपाल से ही अवध गए थे।
 
मुराद के पाेते उस्मान अली से आगे की स्लाइड्स में जानते हैं इसकी खास बातें... 
 
(रोज सुबह लहसुन की एक कली खाने से क्या होगा, जानने के लिए आखिरी स्लाइड पर क्लिक करें...)