(तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)
लाइफस्टाइल डेस्क:चावल घर-घर में पकाया जाता है। पके हुए चावल को लोग भात भी कहते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण के राज्यों में यह मुख्य भोजन है। इसका वानस्पतिक नाम ओरायजा सटाइवा है। चावल शीतल एवं शक्तिवर्द्धक होता है। भारत के अलावा, दुनिया भर के लोग चावल का उपयोग दैनिक भोजन के रूप में करते हैं। चावल धान से प्राप्त होता है। धान की खेती मुख्यत: बारिश के मौसम में होती है। यह संपूर्ण भारत में उगाया जाता है। खाने के अलावा इसका कोई औषधीय महत्व भी हो सकता है, इस बात को शायद कम लोग ही जानते हैं। मध्य भारत और भारत के तमाम आदिवासी इलाकों में लोग खाद्यान्न के अलावा चावल का उपयोग विभिन्न रोगों के निवारण के लिए भी करते हैं। आज जानते हैं मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासी इलाकों में लोग चावल को किस तरह औषधि के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
चावल के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहे हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्य प्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।
1-कब्ज की समस्या दूर करने के लिएडांग-गुजरात के आदिवासियों के अनुसार, ठीक से पका हुआ भात दही के साथ मिलाकर खाने से भी दस्त रुक जाते हैं। जिन्हें अपच की शिकायत हो, वो अगर दही-भात खाएं तो यह समस्या दूर हो जाती है। आदिवासियों के अनुसार, भात और आलू का सेवन एक साथ करने से अपच और गैस होने की संभावना ज्यादा होती है।
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