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बिना इंजेक्शन, बिना ऑपरेशन आंखों की समस्या का होम्योपैथिक इलाज

4 वर्ष पहले
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आंखें कुदरत का अनमोल तोहफा हैं इसलिए इनका ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है। अक्सर हम आंखों के मामले में लापरवाही बरतते हैं। इनका लाल होना या आंसू निकलने की कमी/अधिकता या गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल मान लिया जाता है, लेकिन ये आंखों की गंभीर बीमारी होने के संकेत हो सकते हैं। बारिश के मौसम में इन संकेतों को नज़रअंदाज करेंगे तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। लाल आंखों में दर्द न हो, तो खतरा ज्यादा...
 
 
गैजेट कम कर रहे आंखों की रोशनी-
 
वर्तमान समय में कम्प्यूटर, मोबाइल या दूसरे गैजेट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिसको कम तो नहीं किया जा सकता लेकिन आंखों का समुचित ध्यान रखकर इन्हें हेल्दी बनाए रखा जा सकता है। हमारा खानपान भी अब फास्टफूड बेस्ड ज्यादा हो गया, जिसमें पौष्टिक तत्व नाममात्र के होते हैं। यह कमी भी आंखों की रोशनी कमजोर कर रही है। होम्योपैथी में ऐसी कई दवाइयां हैं जिससे आंखों की थकान, कमजोरी या धुंधलापन में लाभ मिल सकता है।
 
आंखें लाल मतलब 'खतरा', दर्द न हो तो 'ज्यादा खतरा'-
 
आंखें लाल होना आम बात है, लेकिन हर बार ये बेवजह नहीं होता बल्कि किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। अगर आंखें लाल है और उसमें दर्द होता है, तो फिर भी गनीमत है, लेकिन अगर आंखें लाल होने पर दर्द न हो तो यह और ज्यादा खतरनाक स्थिति हो सकती है। लालपन तथा आंखों में दर्द के लिए लक्षणों के आधार पर होम्योपैथिक दवाइयों का प्रयोग श्रेयस्कर होगा।
यहां हम आंखें लाल होने की तमाम वजहों, उस स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और इसके इलाज के बारे में बता रहे हैं-
 
1-कंजक्टिवाइटिस
 
आंख के ग्लोब के ऊपर (बीच में कॉर्निया क्षेत्र को छोड़कर) एक महीन झिल्ली चढ़ी होती है, जिसे कंजक्टाइवा कहते है। कंजक्टाइवा में इंफेक्शन (बैक्टीरियल, वायरल, फंगल) या एलर्जी होने पर सूजन आ जाती है, जिसे कंजक्टिवाइटिस कहा जाता है।
 
बैक्टिरियल कंजक्टिवाइटिस- सुबह आंख चिपकी मिलती है और चिपचिपा पदार्थ आने लगता है। 

वायरल/एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस- अगर आंख लाल हो जाती है, पानी निकलने लगता है। वायरल कंजक्टिवाइटिस 5 से 7 दिन में ठीक हो जाता है। 
 
क्या करें- कंजक्टिवाइटिस होने पर मरीज को दिन में तीन-चार बार आंखें साफ पानी से धोनी चाहिए।

बचाव- कंजक्टिवाइटिस अगर इंफेक्शन की वजह से है तो ऐसे शख्स से हाथ नहीं मिलाना चाहिए। इन्फेक्टेड का तौलिया या रूमाल भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बरसात के मौसम में स्विमिंग पूल में नहीं जाना चाहिए।

क्या करें, क्या नहीं-
 
- आंखों को बिना आराम दिए लंबे समय तक इनके प्रयोग से समस्या बढ़ सकती है इसलिए बीच-बीच में कुछ मिनट का गैप करें। जैसे- लगातार पढ़ना, कम्प्यूटर पर काम करना, टीवी देखना, ड्राइविंग करना, धुएं वाले वातावरण में रहना (सिगरेट का धुआं भी शामिल है), शुष्क वातावरण, एअर कंडीशनर का इस्तेमाल (विशेषकर कार में), हीटर, हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करना आदि। अगर मरीज शुष्क वातावरण से दूर ठंडे स्थानों में रहने को प्राथमिकता दें, तो उससे भी उन्हें आराम मिल सकता है।

- जहां तक संभव हो धूल, धुएं और शुष्क वातावरण से आंखों को बचाएं। लगातार कम्प्यूटर और टीवी के सामने बैठने से बचें। लगातार घंटों किताबें भी न पढ़ें। यदि बैठना आवश्यक हो, तो बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें।

- आंखों में जलन होने पर उन्हें मसलें नहीं, बल्कि पानी से अच्छे से धो लें और थोड़ी देर आंख बंद कर उन्हें आराम दें, फिर काम शुरू करें।

- कम्प्यूटर की चमक से आंखों को बचाने के लिए चश्मा पहनकर ही काम करें।

- आंखें हमेशा माइल्ड सोप से ही धोएं।   

- जहां तक संभव हो हेयर ड्रायर के इस्तेमाल से बचें।

- हीटर की सीधी आंच से आंखों को बचाने के लिए चश्मे का उपयोग करें।

- कम्प्यूटर और टीवी दोनों का ही कंस्ट्रास्ट कम रखें और टीवी को बहुत नजदीक बैठकर न देखें। तकलीफ हो सकती है।
 
 
आगे की स्लाइड्स में जानिए- आंखों से जुड़ी उन दिक्कतों के बारे में, जिनसे आपको बचना है 
 
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