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गंजेपन को खत्म कर डालता है हेयर ट्रांसप्लांट, जानिए पूरी प्रक्रिया और खर्च

गंजेपन के विकल्प के तौर पर हेयर ट्रांसप्लांट लोकप्रिय मैथड बनकर उभरा है।

Danik Bhaskar | Nov 16, 2017, 02:49 PM IST

नई जीवनशैली के चलते या आनुवांशिक वजहों के चलते आजकल गंजेपन की समस्या ज्यादा हो गई है। गंजेपन के विकल्प के तौर पर हेयर ट्रांसप्लांट लोकप्रिय मैथड बनकर उभरा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत व्यक्ति के सिर के अन्य अन्य हिस्से से बाल लेकर सिर में उस जगह प्लांट किए जाते हैं जहां बाल उग नहीं रहे।

भारत में पिछले दो दशक में हेयर ट्रांसप्लांट काफी पॉपुलर हुआ है। पहले सिर्फ सेलेब्रिटी ही हेयर ट्रांसप्लांट कराते थे और इस पर खर्चा भी काफी आता था। लेकिन नई तकनीकों के आने से हेयर ट्रांसप्लांट सस्ता और सुलभ हुआ है जिसका सहारा लेकर आम लोग भी गंजेपन से छुटकारा पा सकते हैं।

आइए जानते हैं कि आखिर कैसे होता है हेयर ट्रांसप्लांट।

कैसे किया जाता है हेयर ट्रांसप्लांट

हेयर ट्रांसप्लांट वो सर्जिकल मैथड है जिसके तहत सिर के पीछे या साइड में जहां घने बाल हैं, वहांसे बाल लेकर उस एरिया में प्लांट किए जाते हैं, जहां बाल नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया में आठ से दस हफ्ते का समय लगता है और इस सर्जरी को विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा ही किया जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि कुछ व्यक्तियों के सिर पर ज्यादा बाल न होने के कारण उनकी छाती और दाढ़ी के बालों को भी सिर पर प्लांट किया जा सकता है। लेकिन आमतौर पर सिर के बालों को ही दूसरों हिस्से में प्लांट करने का चलन है।

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क्या है हेयर ट्रांसप्लांट का तरीका


हेयर ट्रांसप्लांट के लिए हफ्ते में पांच से छह घंटे की एक सर्जरी की सिटिंग होती है जिसके तहत व्यक्ति के सिर में कुछ ही बाल ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। इसी प्रकार कई बार की सिटिंग में तयशुदा बाल ग्राफ्ट किए जाते हैं। इस सर्जरी में एनेस्थीसिया देने वाले स्पेशलिस्ट के साथ साथ अन्य उपकरणों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहते हैं। अगर हेयर ट्रांसप्लांट करवाने वाले को किसी तरह की बीमारी है तो उस पहले ही जान लिया जाता है और उसे ध्यान में रखकर ही हेयर ट्रांसप्लांट किया जाता है।

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FUT मैथड (स्ट्रिप प्रक्रिया)

1. शख्स के बालों की पूरी हिस्ट्री को पढ़ा जाता है, बाल क्यों गायब हुए, ये भी स्टडी की जाती है।
2. गंजेपन के एरिया को डिफाइन किया जाता है।
3. डोनर एरिया (जहां से बाल लेने हैं) को भी डिफाइन किया जाता है।
4. सर्जरी के तहत डोनर एरिया से बालों की एक लंबी स्ट्रिप निकाल ली जाती है
5. गंजेपन के एरिया में वो स्ट्रिप टांकों की मदद से प्लांट कर दी जाती है।
6. इंप्लांट वाले एरिया में इंप्लांट के बाद पट्टियां कर दी जाती है जिन्हें एक दिन बाद खोला जाता है।
7. डोनर एरिया में भी घुलनशील टांके लगाए जाते हैं जो कुछ दिन में ठीक हो जाते हैं।

FUE हेयरलाइन ग्राफ्टिंग (फॉलिकल प्रक्रिया)


हेयरलाइन ग्राफ्टिंग यानी फॉलिकल भी हेयर ट्रांसप्लांट का एक तरीका है। अगर सिर के आगे के हिस्से में बाल कम हैं तो स्ट्रिप टेकनीक के जरिए उसे ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे में एक एक बाल को ध्यान से ग्राफ्ट किया जाता है। इसमें भी सात से आठ घंटे का टाइम लगता है और मरीज को बेहोश किया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का फायदा ये है कि इसमें सिर पर कोई टांके या निशान नहीं पड़ते। यहां तक कि मरीज को महसूस तक नहीं होता कि सर्जरी हुई है।

क्या होता है हेयर ट्रांसप्लांट का असर


डॉक्टर कहते हैं कि हेयर ट्रांसप्लांट होने के दो हफ्तों बार सिर में असर देखा जाता है। गंजेपन से प्रभावित एरिया में दो हफ्ते से तीन हफ्ते के भीतर नए बाल आने शुरू हो जाते हैं। ये बाल बिलकुल अन्य बालों की तरह प्राकृतिक और उसी रंग के होते हैं। दो तीन हफ्ते में छोटे छोटे बाल आते हैं जो बाद में लंबे होते जाते हैं और गंजापन खत्म कर डालते हैं। इसकी खूबी ये है कि ये बाल अन्य बालों की तरह मजबूती से सिर की त्वचा में परनामेंट उगते हैं औऱ जिंदगी भर सिर से उगते रहते हैं।

हेयर ट्रांसप्लांट में कितना खर्च होता है


जहां तक स्ट्रिप मैथड की बात है तो एक बाल की ग्राफ्टिंग में 30 से 40 रुपए का खर्चा आता है। इसके अलावा सिटिंग और अन्य उपकरणों का खर्चा भी जोड़ा जाता है। दूसरी तरफ एडवांस तकनीक यानी फॉलिकन मैथड (FUT) में 50 से 60 रुपए प्रति बाल की ग्राफ्टिंग का खर्च आता है।