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जिनकी शादी के बिना भी पहचान है, उन औरतों की कहानी ‘Status Single’

स्टेट्स सिंगल एक ऐसी किताब है, जिसमें विचारोत्तेजक सामग्री भी प्रभावी गहराई लिए है।

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 07:45 PM IST
बुक के साथ श्रीमोई बुक के साथ श्रीमोई

हम अक्सर किताबें पढ़ते हैं। कहानी, किस्से, इतिहास, फिलॉसफी सब कुछ। इनमें रियल लाइफ स्टोरीज भी हैं, जो पढ़ने वाले के मन पर सीधे असर करती हैं। ऐसी ही एक किताब आई है, जो अविवाहित महिलाओं के संघर्ष, उनकी तकलीफ और अपने होने की वजह को मजबूती से बयां करती है।


लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट रह चुकीं श्रीमोई पीउ कुंडू 'स्टेट्स सिंगल' के जरिए भारत में 30 की उम्र के पार भी अविवाहित होने के मायनों के रहस्य से पर्दा उठा रही है। स्टेट्स सिंगल में संकलित कहानियों के जरिए वे उन महिलाओं के जीवन के उतार-चढ़ाव और अविवाहित शहरी महिलाओं की समाज में स्थिति को दर्शा रही है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में तकरीबन 7.41 करोड़ महिलाएं या तो तलाकशुदा हैं, या पति से अलग हैं, विधवा है या फिर उनकी कभी शादी ही नहीं हुई और यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है।


आखिर क्यों लिखने की जरुरत पड़ी-
वजह है शादी! जाहिर है भारत में हर लड़की को इस रास्ते पर चलना पड़ता है। यह माना जाता है कि शादी उन्हें परिभाषित करती है, एक आकार देकर उनके जीवन को भी मायने देती है। लेकिन क्या ऐसा वाकई है? चाहे महिला अपनी मर्जी से अविवाहित रहे या परिस्थितिवश, वे हर स्थिति में समाज की ओर से एक तरह का दबाव और आलोचना झेलने के साथ सवालिया निगाहों में रहती है। चाहे वह घर किराए पर लेने की परेशानी हो, या आपके स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा चारित्रिक हनन, या फिर अपनी शारीरिक इच्छाओं की अपनी पसंद से पूर्ति पर अपमान झेलना, चाहे फिर आप एक सफल महिला ही क्यों न हो, यह समाज एक अविवाहित महिला के जीवन को लेकर पसंद-नापसंद को आसानी से चकनाचूर कर देता है। स्टेट्स सिंगल उन्हीं मुश्किलों की कागजों में बयानी है।


स्टेट्स सिंगल को खास बनातीं बातें


- स्टेट्स सिंगल अविववाहित महिलाओं के ऊपर लिखी गई संभवतः भारत की पहली किताब है।
- यह किताब उन मुद्दों को सामने ला रही है जिनपर इससे पहले अविवाहित महिलाओं को होने वाली परेशानियों के ध्येय से पहले कोई बहस नहीं हुई।
- एक अलग ही दृष्टिकोण और छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से यह असल जीवन की कहानियों को सामने लाती है जिनका प्रभाव अकेली महिलाओं पर है।
- भारत की तकरीबन तीन हजार महिलाओं की बेबाक प्रतिक्रिया के साथ, जिसमें कई गौरी सावंत (पहली किन्नर महिला जो पहले केबीसी और अब विक्स के विज्ञापन में आईं) जैसे जाने-माने नाम भी शामिल हैं।
- लेखिका सम्मानित पत्रकार हैं। उन्हें एनडीटीवी वुमन वॉर्थ अवॉर्ड में साहित्य की श्रेणी में पुरस्कार से नवाजा गया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र की ओर से बेस्ट यंग राइटर का सम्मान भी 2012 में मिला है। वे जेंडर और सेक्सुअलिटी पर लगातार मैग्जीन और कई वेबसाइट्स के लिए लिखती हैं।
- स्टेट्स सिंगल एक ऐसी किताब जिसमें विचारोत्तेजक सामग्री प्रभावशाली गहराई लिए है जो निश्चित रूप से एक कड़ी चर्चा और बहसों का हिस्सा बनने वाली है।

क्यों पढ़ें

यह किताब देश में अकेली महिला होने भर से उपजे रोजमर्रा के संघर्ष को गुस्से और एकाकीपन के साथ पेश करती है। ‘स्टेटस सिंगल’ सभी महिला-पुरुषों को, चाहे वे अकेले हैं या विवाहित, जरूर पढ़नी चाहिए।


क्यों न पढ़ें

अगर ऐसी महिलाओं से आपका कोई वास्ता न हो या आप खुद को इनसे कभी भी प्रभावित न मानते हों। हालांकि हम सभी का स्टेट्स कभी न कभी 'सिंगल' जरूर रहा है।

श्रीमोई के बारे में


श्रीमोई, लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट रह चुकी हैं। फिलहाल जेंडर और सेक्सुअलिटी पर कॉलम लिखती हैं। स्टेट्स सिंगल, नॉन-फिक्शन कैटेगरी में उनकी पहली किताब है। श्रीमोई कोलकाता और दिल्ली, दोनों को बराबर समय देती हैं।


किताब का नामः स्टेट्स सिंगल, द ट्रूथ अबाउट बीइंग ए सिंगल वुमन इन इंडिया
राइटर- श्रीमोई पीउ कुंडू
पब्लिशरः Amaryllis, मंजुल पब्लिकेशन का इम्प्रिंट
कीमतः 299 रुपए
अमेज़न पर उपलब्ध

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