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‘बाकी की बात’ – 15 कहानियों में झांकता मिल जाएगा आपका ही कोई सच

Dainik Bhaskar

Dec 18, 2017, 03:49 PM IST

लेखिका ने भी लिखा है- ‘इन काल्पनिक कहानियों के बीच आपको अपना ही कोई सच झांकता हुआ मिल जाए, तो बिल्कुल हैरान न होइएगा।

Book Review of Baaki Ki baat By Nandini kumar

देहरादून की नंदिनी कुमार की नई किताब ‘बाकी की बात’ 15 कहानियों का संग्रह है जो हमारे-आपके आस-पड़ोस की लगती हैं। जैसा कि शीर्षक है, उसी आधार पर कथानक भी वही है, जो अक्सर अनकहा रह जाता है या जिसे कहने की जरुरत नहीं होती। नंदिनी की हिंदी में यह पहली किताब है, लेकिन उनका लेखन यह नहीं कहता।

मंटो की किताब पढ़कर हिंदी में कहानियां लिखने की हिम्मत जुटाने वाली नंदिनी के लेखन में कहीं-कहीं ‘मंटो’ साफ झलकते हैं। शर्मा जी, भीख, आज़ाद ब्यूटी पार्लर जैसी कहानियों का अंत भी थोड़ा निर्दयी-सा लगता है। और यही अंत, शायद इन कहानियों की खूबसूरती भी है।

‘बाकी की बात’ की कहानियां सबकी हैं। मां, भाभी की हैं, बेटी, बहन, पत्नी या विधवा के जीवन की हैं। कहीं भिखारी की ख्वाहिश भी झलकती हैं, तो कहीं स्कूली लड़कियों में यौन-आकर्षण भी दर्शाया गया है। इन कहानियों में कहीं कामवाली नायिका है, तो लड़की वाले भी हैं। और जैसा लेखक ने लिखा है- ‘इन काल्पनिक कहानियों के बीच आपको अपना ही कोई सच झांकता हुआ मिल जाए, तो बिल्कुल हैरान न होइएगा।’

क्यों पढ़ें
हल्की-फुल्की लेकिन सवाल छोड़ जाने वाली कहानियां पढ़ने का शौक हो, तो जरूर पढ़ें। लेखिका की कलम निराश नहीं करेगी।


कमी सिर्फ इतनी सी है
कई जगह कहानी का कोई हिस्सा थोड़ा बोरिंग लग सकता है, जैसे बेवजह खींचा गया हो। शुरुआती 5 कहानियों के बाद ये साफ झलकेगा भी। इसके अलावा कुछ कहानियों मे किरदार अपने मूल स्वभाव से अलग दिखते हैं। जैसे-‘आज़ाद ब्यूटी पार्लर’ की सुजाता की कहानी की शुरुआत उसके संघर्ष से होती है, लेकिन वह कब जवान गुरसिमरन के आकर्षण में उलझ कर ब्यूटी पार्लर पहुंच जाती है, ये पाठक को खुद ही समझना होगा। बाकी की बातें समझदारी की हैं क्योंकि बातें ही बाकी की जो हैं।

नंदिनी के बारे में
हिंदी में नंदिनी नई हैं, लेकिन लेखन में उनका अनुभव थोड़ी उम्र तय कर चुका है। दूहरादून की नंदिनी के अंग्रेजी में अब तक कई कहानियां और लेख छप चुके हैं। फिलहाल प्रशिक्षित पर्वतारोही भी हैं, जिसे पहाडों में आराम फरमाना और मीठी चाय पसंद है।

किताब का नाम- बाकी की बात
लेखिका-नंदिनी कुमार
प्रकाशन- हिंद युग्म (BLUE)
कीमत-100 रुपए

अमेज़न पर उपलब्ध

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Book Review of Baaki Ki baat By Nandini kumar
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