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किसी अखाड़े से कम नहीं है सोशल मीडिया, यहां सिर्फ नजर आती है टांग खिंचाई

7 वर्ष पहले
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लाइफस्टाइल डेस्क: सोशल मीडिया आपको उकसाता है, ग़ुस्सा दिलाता है और अक्सर आपके नकारात्मक पहलुओं को दुनिया के सामने ले आता है। यहां अक्सर कड़वाहटें, अफ़सोस, असहमतियां, रोष, विरोध, टांग खिंचाई और उग्र समर्थन ही नजर आते हैं। इसमें ‘सामाजिकता’ कहां है?

सोशल मीडिया यानी इंटरनेट पर ऐसे मंच जहां आप खुलकर अपनी बात कह सकते हैं, दूसरों के कहे पर टिप्पणी कर सकते हैं और बहुत कुछ साझा कर सकते हैं। यहां अभिव्यक्ति की बेहिसाब स्वतंत्रता है, लेकिन बहुत सारे मामलों में ‘आपकी स्वतंत्रता वहां खत्म हो जाती है, जहां से मेरी नाक शुरू होती है’ वाला जुमला यहां लागू नहीं होता।

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की असामान्य मौत को भारत में ‘पहली ट्विटर हत्या‘ कहा जा रहा है तो इसके पीछे ठोस वजहें हैं। जांच कुछ भी कहता हो, किंतु तकरीबन हर व्यक्ति को मालूम है कि ट्विटर सुनंदा को लम्बे समय से तनाव दे रहा था। इस माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर अपने पति की अति सक्रियता से वे परेशान थीं और सार्वजनिक तौर पर स्वीकार भी कर चुकी थीं। उन्होंने इसे अपनी ‘सौतन‘ तक कहा था। आखिरकार, एक बेहद निजी विवाद ट्विटर के जरिए दुनिया के सामने आया और सुनंदा के जीवन के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हुआ। एक त्रिकोणीय मुद्दे में अचानक बेवजह लाखों लोग शामिल कर लिए गए थे।

आगे की स्लाइड में जानिए क्यों सोशल साइट पर टिप्पणियां करना और लोगों से जुड़ना सबसे बड़ा आकर्षण है...