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कभी तकरार, कभी इमोशन, ऐसा है ये रिलेशन!

ननद-भाभी का ये खट्टा मीठा रिश्ता।

Danik Bhaskar | Oct 13, 2013, 12:26 PM IST
मेघा ने अपने घरवालों के खिलाफ जाकर बॉबी से शादी की थी। पहले दो साल तो सब ठीक रहा। इसी दौरान मेघा मां भी बन गई। धीरे-धीरे उसका पति उससे खराब बर्ताव करने लगा। रोज-रोज के टार्चर से दुखी होकर मेघा ने इस रिश्ते को खत्म कर देना चाहा, लेकिन यह इतना आसान नहीं था। उसे घर वालों के सपोर्ट की जरूरत थी।
निसंदेह उसके माता-पिता ने तो उसका साथ दिया ही, लेकिन एक शख्स जिसने सबसे ज्यादा मेघा का साथ दिया वो थी उसकी भाभी आरती। उसने अपनी ननद के लिए वो कर दिखाया जो असंभव लगता था। ननद और भाभी के रिश्ते में मिठास कम ही देखने को मिलती है, लेकिन आरती ने एक मिसाल कायम की कि ननद -भाभी का रिश्ता मिठास भरा भी हो सकता है।
आगे की स्लाइड में जानिए ननद-भाभी के रिश्ते में किन बातों का रखें ख्याल...

परंपरावादी दृष्टि से देखा जाए तो इस रिश्ते में खींचातानी ही देखने को मिलती है, लेकिन आज की पीढ़ी की सोच में बदलाव देखने में आ रहा है। अब ज्यादातर लोग खुली सोच रखते हैं। जहां यह रिश्ता मिठास भरा अधिक है और कड़वाहट कम नजर आती है। इसमें एक फैक्टर जो काम करता है वह है उम्र का अंतर। अगर ननद भाभी हमउम्र हैं तो एक-दूसरे को ज्यादा समझेंगी।

हमउम्र ननद अपनी भाभी से हर एक बात शेयर कर सकती है। वो बात भी जो वह अपने भाई से भी शेयर नहीं कर सकती, लेकिन यदि यह अंतर ज्यादा है तो प्रोब्लम आती है। दूसरा कारण है पारिवारिक मूल्य और संस्कार जिनमें रहते हुए एक बच्चा बड़ा होता है। 
 
 
ननद अपनी भाभी से किस तरह बर्ताव करती है यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी परवरिश कैसे हुई है? यदि उसकी मां में इंसिक्योरिटी की भावना होगी तो उसमें भी असुरक्षा की भावना आना स्वाभाविक है। इसमें कोई शक नहीं कि सास की ननद-भाभी के रिश्ते में एक अहम भूमिका होती है। जैसे मां के संस्कार वैसे ही बेटी के भी होने की संभावना रहती है। 
 
 
 
ऐसा भाभी के केस में भी हो सकता है। भाभी को भी अपनी ननद से एक बहन जैसा बर्ताव करना पड़ेगा। उसी स्थिति में वह अपनी ननद से अच्छे व्यवहार की उम्मीद कर सकती है। इंसान का व्यवहार बहुत कुछ उसके संस्कारों पर ही निर्भर करता है। 

 

 कुछ मामलों में ननद को अपने भाई और भाभी के बीच की इंटीमेसी पंसद नहीं आती। उसे लगता है कि अब उसका महत्व कम हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं होता। यही बात जब ननद के साथ उसके ससुराल में होती है तो उसका नजरिया कुछ और होता है। विचारों में विरोधाभास नहीं होना चाहिए। यह रिश्ता मिठास भरा रहे उसके लिए दोनों ही पक्षों को छोटी छोटी बातों का ख्याल रखना पड़ेगा।

इन बातों का रखें ध्यान
 
ननद और भाभी को एक-दूसरे को समझना चाहिए।
 
दोनों को ही एक-दूसरे को स्पेस देना पड़ेगा।
 
एक-दूसरे की भावनाओं और इच्छाओं का ध्यान रखना होगा।
 
रिश्तों में डबल स्टैंडर्ड न अपनाएं।
 
किसी भी रिश्ते में मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा आदि बातें कड़वाहट पैदा करती हैं इन्हें बीच में न आने दें।