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UC ब्राउजर पर इस समय नहीं मिलती डाउनलोडिंग स्पीड, डाटा हो रहा चोरी!

गूगल का ऐसा मानना है कि UC ब्राउजर भारतीय यूजर्स का पर्सनल डाटा चीन स्थित अपने सर्वर पर भेज रहा है।

Danik Bhaskar | Nov 16, 2017, 03:30 PM IST

गैजेट डेस्क। अलीबाबा ग्रुप के UC ब्राउजर को गूगल ने अपने प्ले स्टोर से हटा दिया है। हालांकि, इसे हमेशा के लिए नहीं हटाया गया है। फिलहाल यूजर्स इस ब्राउजर को अगले 30 दिन यानी 15 दिसंबर तक प्ले स्टोर से इन्स्टॉल नहीं कर सकेंगे। गूगल का ऐसा मानना है कि UC ब्राउजर भारतीय यूजर्स का पर्सनल डाटा चीन स्थित अपने सर्वर पर भेज रहा है। साथ ही, यदि यूजर इस ब्राउजर को फोन से अनइन्स्टॉल कर देते हैं तब भी ये आपको डिवाइस को कंट्रोल कर सकता है। यानी अब ये ब्राउजर आपके फोन के लिए थर्ड पार्टी ऐप बना चुका है।

# UC ब्राउजर बना थर्ड पार्टी ऐप

प्ले स्टोर ने जैसे ही इस ब्राउजर को अपनी ऐप लिस्ट से हटाया, ये थर्ड पार्टी ऐप बन गया। यानी यूजर को अब ये ब्राउजर APK फाइल की मदद से फोन में इन्स्टॉल करना होगा। साथ ही, अपने एंड्रॉइड फोन के अननॉन सोर्स को भी ON करना होगा। एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर को कभी भी APK फाइल वाले किसी भी ऐप्स को इन्स्टॉल करने की इजाजत नहीं देता। यानी अगर APK फाइल से आपके फोन को किसी तरह का नुकसान या फोन डेमेज होता है, तो इसकी जिम्मेदारी गूगल की नहीं होगी।

आगे की स्लाइड्स पर जानिए UC ब्राउजर पर किस समय कम हो गई डाउनलोडिंग स्पीड...

# UC पर कम हुई डाउनलोडिंग स्पीड

 

UC ब्राउजर पर मूवी और सॉन्ग को आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। यहां यूजर डाउनलोडिंग को पॉज करने और पॉज से स्टार्ट करने की सुविधा भी देता है। यही वजह है कि भारत में इसे यूज करने वाले यूजर्स कई गुना बढ़ चुके हैं। हालांकि, जो यूजर्स इसे यूज कर रहे हैं उनका कहना है कि अब ब्राउजर पर पहले जैसी डाउनलोडिंग स्पीड नहीं मिलती। खासकर, रात 8 बजे के बाद पहले 4mbps से 7mbps तक की डाउनलोडिंग स्पीड आती थी, वो घटकर 1mbps से भी कम हो गई है। ऐसे में हो सकता है कि गूगल ने UC पर डाटा चीन स्थित अपने सर्वर पर भेज की जो बात कही है, वो सही हो।

 

 

# जो यूज कर रहे उनका क्या?

 

UC ब्राउजर यूज करने वाले भारत में लाखों यूजर्स हैं। ऐसे में इस ब्राउजर का ऐप जिसके भी फोन में है वो उसे अपडेट नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, गूगल इसके लिए किसी तरह की सिक्युरिटी नहीं देगी। यानी यूजर अपनी रिस्क पर इस ब्राउजर का इस्तेमाल कर सकता है। वैसे, 30 दिन के बाद यदि इसे फिर से प्ले स्टोर पर एड किया जाता है तब यूजर को इससे जुड़े अपडेट मिलते रहेंगे।