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27 दिनों में नीरज का ‘हमसफर एवरेस्ट’, बर्फीले सफर का सुंदर वृत्तांत

नीरज ‘सुनो लद्दाख (चादर ट्रैक और पदुम-दारचा ट्रैक का वृत्तांत)’ और ‘पैडल-पैडल (साइकिल से लद्दाख यात्रा)’ लिख चुके हैं।

अविनाश श्रीवास्तव | Last Modified - Dec 18, 2017, 03:39 PM IST

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    नीरज मुसाफ़िर, जब नाम में ही यायावरी जुड़ी हो तो यात्रा वृत्तांत ही लिखे जाते हैं। पेशे से इंजीनियर और स्वभाव से यात्री नीरज की नई किताब ‘हमसफर एवरेस्ट’ यूं तो उन लोगों के लिए ज्यादा है जो एवरेस्ट या ऐसे किसी मिशन के लिए खुद को समर्पित करना चाहते हैं, लेकिन जो यात्रा नहीं चाहते, वे भी पढ़ेंगे तो निश्चित ही बैग पैक कर जूते कसकर तैयार खड़े हो जाएंगे।

    ‘हमसफर एवरेस्ट’ से पहले नीरज ‘सुनो लद्दाख (चादर ट्रैक और पदुम-दारचा ट्रैक का वृत्तांत)’ और ‘पैडल-पैडल (साइकिल से लद्दाख यात्रा)’ लिख चुके हैं। इससे ज़ाहिर होता है कि यात्रा और खासकर पहाड़, नीरज के लेखन की स्याही की तरह हैं। उनका ब्लॉग भी ऐसी ही गवाही देता है।

    हमसफर… में नीरज ने एवरेस्ट तक की अपनी यात्रा की आंखन-देखी बखूबी लिखी है, ऐसी कि सामान्य पर्यटक भी यात्री बनने को उत्सुक हो जाए। बारीक से बारीक विचार, परिस्थितिजन्य उपजे भाव उन्होंने खूबसूरत कथानक की शक्ल में बयां किए हैं।

    नीरज का लेखन बहते पानी की तरह है। इस 27 दिन की एवरेस्ट यात्रा में वे जो देखते, सुनते, समझते या महसूस करते हैं उसे बखूबी बयां करने में सफल हुए हैं। अपने पड़ावों की कठिनाई के साथ जगह की खूबसूरती को उन्होंने अच्छे से कलमबद्ध किया है, साथ ही उन कठिनाइयों को भी, जो इस यात्रा में आईं। ये वृत्तांत एवरेस्ट यात्रियों के लिए गाइड हो सकती है, जिससे वे समझ सकें कि एवरेस्ट फतह कैसे होगी।

    कमी तस्वीरों की लगी

    इस किताब में अगर किसी चीज़ की कमी है तो वो हैं तस्वीरें। जो इक्का-दुक्का हैं वो श्वेत-श्याम होने की वजह से न बयां हो पा रही हैं, न ही ये ज़ाहिर कर पा रही हैं कि उन्हें किताब में स्थान क्यों मिला। संभव है कि तस्वीरों के मामले में लेखक और प्रकाशक की राय एक न हो, लेकिन ज़ाहिर तौर पर पाठक इसे खोजेगा। और जैसा कि नीरज ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि किताब का शीर्षक प्रकाशक का चयन है, तो वह गलत बिल्कुल नहीं है। ये किताब एवरेस्ट यात्रा करने वाले हरेक शख्स की हमसफर बनने लायक भी है।

    क्यों पढ़ें
    यात्रा, पर्यटन से थोड़ा भी लगाव रखते हों या नीरज को पहले पढ़ा हो, तो ‘हमसफर एवरेस्ट’ जरूर पढ़ें। किसी सफर का यात्री बनने का शगल हो, तो भी। जिन सधे हुए शब्दों में सफर को बयां किया गया है वह वृत्तांत कम, कहानी ज्यादा लगता है और यही इस किताब की सबसे बड़ी खासियत भी है। पाठक को पढ़ने के सभी जरूरी कारण देती है हमसफर एवरेस्ट।


    क्यों न पढ़ें
    पहला और ज़ाहिर कारण-यात्रा वृत्तांत पसंद न हो तो न पढ़ें। एवरेस्ट की ऊंचाई से लगाव न हो, तो भी।

    नीरज के बारे में
    1988 में मेरठ की मिट्टी में जन्मे नीरज मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हैं। दिल्ली मेट्रो दौड़ाने इनका भी हाथ है। 2008 से ब्लॉग राइटिंग कर रहे हैं। लोग यात्रा पर निकलने से पहले आज भी नीरज की जरूरी सलाह लेते हैं, यही उनके लेखन की कामयाबी है। फेसबुक पर भी खासे सक्रिय हैं।

    किताब का नाम-
    हमसफर एवरेस्ट
    लेखक-नीरज मुसाफिर
    प्रकाशन- हिंद युग्म
    कीमत-150 रुपए

    अमेज़न पर उपलब्ध

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