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पिता के बनाए घर में हिस्सा लेने का बेटे को नहीं होता कानूनी अधिकार

dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 15, 2018, 02:19 PM IST

प्रॉपर्टी के कानूनों को लेकर अब भी लोगों में काफी कंफ्यूजन है। समय-समय पर कोर्ट ऐसे फैसले देते आए हैं, जिन्हें जानकार आप
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    यूटिलिटी डेस्क। प्रॉपर्टी के कानूनों को लेकर अब भी लोगों में काफी कंफ्यूजन है। समय-समय पर कोर्ट ऐसे फैसले देते आए हैं, जिन्हें जानकार आप अपने कंफ्यूजन क्लियर कर सकते हैं। आज हम ऐसे ही एक फैसले के बारे में बता रहे हैं जो दिल्ली हाइकोर्ट ने पिता की संपत्ति को लेकर सुनाया था। ऐसी कोई भी संपत्ति जो पिता ने खुद बनाई है, उस पर बेटी या बेटी का या कानूनी अधिकार नहीं होता। हाईकोर्ट एडवोकेट संजय मेहरा का कहना है कि ऐसे में बच्चे सिर्फ

    पिता की दया पर ही रह सकते हैं। पिता की इच्छा के बिना कोई भी संपत्ति पर दावा नहीं जता सकता।

    फिर किस संपत्ति पर होता है हक
    पैतृक संपत्ति पर बच्चों का हक होता है। पैतृक संपत्ति वो संपत्ति होती है, जो पूर्वजों द्वारा बनाई जाती है। ऐसी संपत्ति में बेटा या बेटी अपना हक जता सकते हैं, लेकिन यदि पिता ने खुद कोई संपत्ति बनाई है तो उसे बच्चों को देना है या नहीं, यह फैसला सिर्फ पिता ही ले सकते हैं। यदि पिता अपनी संपत्ति किसी के नाम नहीं करते और उनकी मृत्यु हो जाती है तो ऐसे केस में वैध उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति का बंटवारा किया जाता है। इसमें लड़का हो या लड़की दोनों को ही संपत्ति में हिस्सेदारी का समान हक होता है।

    किसी के भी नाम कर सकते हैं संपत्ति, देखिए अगली स्लाइड में...

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    किसी के भी नाम कर सकते हैं संपत्ति

    > ऐसे केस में पिता अपनी संपत्ति किसी के भी नाम कर सकते हैं। हिंदु उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पिता संपत्ति का जिस तरह से बंटवारा करके जाते हैं, उसी तरह से संपत्ति उत्तराधिकारियों के बीच बांटी जाती है। इस तरह के एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पैरेंट्स के पक्ष में फैसला सुना चुका है। बेटे ने पिता की संपत्ति पर हक जताया था। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था और पिता के पक्ष में फैसला दिया था।

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Web Title: Son Has No Legal Right In Parents House
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