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डाउनलोड करेंलाइफस्टाइल डेस्क: यह याददाश्त को प्रभावित करने वाली एक मानसिक गड़बड़ी है, जिसे डिमेनशिया भी कहा जाता है। अल्जाइमर इसी मानसिक गड़बड़ी का सबसे सामान्य रूप है। सन 1906 में जर्मन के डॉ. ओलोए अल्जीमीर ने एक महिला के दिमाग के परीक्षण में पाया कि उसमें कुछ गांठे पड़ गई हैं, जिन्हें चिकित्सक ‘प्लेट’ कहते हैं। यही रोग उस डॉ. के नाम पर अल्ज़ाइमर रोग कहलाया जाने लगा।
अल्जाइमर की समस्या उम्र बढ़ने के साथ-साथ आनी शुरू हो जाती है। यह एक गंभीर मानसिक बीमारी है और इस रोग से पीड़ित व्यक्ति का मस्तिष्क प्रभावित होने लगता है। इस रोग से प्रभावित रोगी की मस्तिष्क की कोशिकाओं का एक-दूसरे से संपर्क टूटने लगता है और धीरे-धीरे मृत स्थिति में आ जाता है। आम तौर पर अल्जाइमर वृद्धावस्था में होता है। यह 60 साल से अधिक आयु के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है। बहुत ही कम केसों में 30 या 40 की उम्र में लोगों को ये बीमारी होती है।
पुरुषों में जहां 60 वर्ष की अवस्था में अल्जाइमर की शिकायत शुरू होती है, वहीं महिलाओं में इसके लक्षण 45 वर्ष की अवस्था में दिखते हैं। इस रोग से प्रभावित लोगों में आवश्यक रसायनों की कमी तेजी से होने लगती है। ये रसायन ही मुख्य तौर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान (संवाहक) के तौर पर काम करते हैं। समय के साथ-साथ इस रोग से प्रभावित रोगी के मस्तिष्क का अधिकांश भाग क्षतिग्रस्त होने लगता है और फिर एक समय ऐसा आता है कि उसे कुछ भी याद नहीं रहता।
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