तकनीक के साथ-साथ हमारा वास्तविक जीवन और हमारा वचरुअल चेहरा लगभग एक हो गए हैं। हमें नहीं पता है कि हम कहां खत्म होते हैं और हमारी
फेसबुक जिंदगी कहां शुरू होती है और खतरा यहीं कहीं बीच में मंडरा रहा होता है।
हाल ही में एक खबर पढ़ी। देहरादून की एक महिला फेसबुक पर किसी से मिली और दोस्ती में उन्हें एक करोड़ रुपए दे भी दिए। उनके फेसबुक फ्रेंड बुजुर्गो के लिए एक आश्रम खोलना चाहते थे। मामला फर्जी निकला। महिला अपने पैसे खो बैठी और उनके फ्रेंड पैसे लेकर फरार हो गए। आप सोच सकते हैं कि यह महिला बेवकूफ थी, जिसने एक अनजान आदमी को इतने पैसे दे दिए, लेकिन इस घटना से एक बात साफ होती है — वह यह, कि वास्तविक जिंदगी और वचरुअल जिंदगी के बीच फर्क कम होता जा रहा है। या यूं कहें कि हम इसमें फर्क नहीं कर पा रहे हैं। फेसबुक की दुनिया में खतरे कई स्तर के हैं। एक आपके निजी स्तर पर होता है। आप किसे अपना दोस्त बनाते हैं, आप अपने प्रोफाइल में कितनी जानकारी देते हैं और क्या आपके अकाउंट की सेटिंग ऐसी है कि लोग आपके फोटो डाउनलोड करके उनका गलत इस्तेमाल न करें!
यूरोप और खास तौर से जर्मनी जैसे देशों में निजी जानकारी और निजी जीवन को बचाकर रखा जाता है। लोग अपने बारे में कम जानकारी देना पसंद करते हैं। इसलिए आए दिन यहां
गूगल मैप्स को लेकर शिकायत होती है या लोग फेसबुक जैसी वेबसाइट की डाटा नीतियों का विरोध करते हैं। भारत और आसपास के देशों में ऐसा नहीं है। इसकी एक वजह वहां की बातचीत और मिलनसार संस्कृति भी हो सकती है, जो लोग अपने बारे में ज्यादा जानकारी देने से नहीं झिझकते। दूसरा यह हो सकता है कि भारत जैसे देशों में युवाओं के आपस में मिलने-जुलने के मौके कम हैं और फेसबुक में नए लोगों से मिलना आसान हो जाता है, लेकिन इस चक्कर में असली और वचरुअल दुनिया के बीच की सीमा मिट जाती है।
महिलाओं के लिए यह काफी मुश्किल कर सकता है, खासतौर से अगर अकाउंट पर प्राइवेसी सेटिंग सही नहीं हो। ऐसे में लोग परेशान करते हैं, कुछ लोग आपको बहला-फुसलाकर कहीं आपसे मिलने की बात कर सकते हैं। कई महिलाएं मान भी लेती हैं और लोगों से मिलती हैं। ऐसे में दुष्कर्म, चोरी और इस तरह की घटना होने का डर रहता है।
फेसबुक के खतरे का दूसरा स्तर है फेसबुक खुद। कुछ महीने पहले फेसबुक ने इमोशनल कंटेजियन नाम की एक रिपोर्ट निकाली। इसमें बताया गया कि फेसबुक ने सात लाख यूजर्स को अपने एक प्रयोग में शामिल किया है। इसमें फेसबुक ने यूजर्स की भावनाओं पर नियंत्रण करने की कोशिश की। प्रयोग के पीछे शोधकर्ताओं ने तर्क लगाया कि अगर एक यूजर एक पोस्ट करता है तो उसके दोस्त और जान-पहचान वालों पर इसका अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट में बताया गया, ‘इमोशनल कंटेजियन यानी भावनाओं के संक्रमण के जरिए भावनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्तितक लाया जा सकता है, जिससे कि लोग बिना जाने एक ही तरह की भावना महसूस करेंगे।’
पहली नजर में तो यह काफी साधारण लगता है। अगर आपके दोस्त खुश होकर एक पोस्ट लिख रहे हैं, तो आप भी खुश होंगे, लेकिन फेसबुक ने इस प्रयोग के लिए पोस्ट्स को नियंत्रित किया ताकि यूजरों तक केवल कुछ खास पोस्ट्स पहुंचें। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ ऐसे लोग थे, जिनके न्यूज फीड में किसी तरह की भावना भरी खबर नहीं थी और उन्होंने किसी भी मुद्दे के बारे में ज्यादा पोस्ट नहीं किए। फेसबुक के प्रयोग से पता चला कि फेसबुक पर लोगों के पोस्ट्स उनकी भावनाओं को प्रभावित करते हैं। मार्केटिंग कंपनियों ने इसका अच्छा इस्तेमाल किया है। फोर्ब्स मैगजीन ने इस तरह के प्रयोग की मिसाल देते हुए कहा कि महिलाएं अपने कपड़ों और दिखावे पर ध्यान देती हैं। मार्केटिंग कंपनियों ने यह देखकर खास विज्ञापन करना शुरू किया। अब मार्केटिंग कंपनियों को पता चल गया है कि वह भावनाओं को अपने हिसाब से मोड़ सकते हैं और अपना माल बेचने के लिए फेसबुक पर पोस्ट्स और ऐड्स डाल सकते हैं।
अब विज्ञापन कंपनियां फेसबुक पर आपके पोस्ट पढ़ सकती हैं, आपकी पसंदीदा चीजें रिकॉर्ड कर सकती हैं और आपके हिसाब से आपके सामने ऐड्स ला सकती हैं। फेसबुक सिर्फ आपके अकाउंट में ही नहीं, बल्कि आपके वेब ब्राउजर पर भी उन सब वेबसाइट्स की जानकारी रिकॉर्ड कर लेगा जो आपने देखे हैं। इससे आपके इंटरनेट यूसेज को रिकॉर्ड किया जा सकेगा और आपके हिसाब से विज्ञापन लगाया जा सकेगा।
एक बात तो साफ है, फेसबुक के जरिए फेसबुक निर्माता मार्क जुकरबर्ग और उनके शेयरहोल्डर पैसे कमाना चाहते हैं, लेकिन फेसबुक बहुत लोकप्रिय भी है। आम लोगों से लेकर कंपनियों तक, फेसबुक सबके लिए संदेश पहुंचाने और खबर लेने का जरिया बन गया है। यहां तक कि ट्यूनीशिया में क्रांति और मिस्र में लोगों का सरकार के खिलाफ विरोध, सब काफी हद तक फेसबुक से संभव हुआ।
किसी भी देश की सरकार अगर लोगों की राय सेंसर करना चाहती है तो वह फेसबुक और
ट्विटर पर बैन लगाती है। यह तुर्की, पाकिस्तान और यहां तक कि भारत में भी हुआ जब ममता बैनर्जी ने अपने खिलाफ फेसबुक पर पोस्ट करने वाले लोगों को गिरफ्तार करवाया।
और सच मानें तो फेसबुक में मजा भी आता है। यह एक ऐसी जगह है जहां दिन भर की थकान के बाद दोस्तों से मिल सकते हैं। अगर बड़े शहर में रहते हैं तो फेसबुक पर चैट और फोटो के जरिए बात हो सकती है। ध्यान सिर्फ इस बात का रखना है कि फेसबुक में संतुलन बनाए रखें। इसे अपनी Êिांदगी चलाने न दें, बल्कि इसे अपने काम के लिए इस्तेमाल करें, इससे अपने को इस्तेमाल होने न दें।