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अंतरिक्षवासी सैटेलाइट

6 वर्ष पहले
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सैटेलाइट का नाम हम अक्सर सुनते रहते हैं, पर क्या हम सचमुच जानते हैं कि सैटेलाइट्स क्या हैं और हमारे दैनिक जीवन में ये किस तरह से उपयोगी हैं-

सैटेलाइट दो तरह की होती हैं

1. नैचुरल सैटेलाइट 2. आर्टिफिशियल सैटेलाइट

नैचुरल सैटेलाइट

सैटेलाइट यानी उपग्रह या ऐसे ग्रह, जो सूरज या किसी दूसरे ग्रह के चक्कर लगाते हैं, जैसे- पृथ्वी एक उपग्रह है, जो सूरज के चक्कर लगाती है। चंद्रमा भी एक उपग्रह है, जो पृथ्वी के चक्कर लगाता है।

आर्टिफिशियल सैटेलाइट

आर्टिफिशियल सैटेलाइट शब्द एक मशीन के लिए इस्तेमाल होता है, जो अंतरिक्ष में पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह के आसपास घूमती है। यह कई तरह की हैं, जैसे- अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, कम्युनिकेशन सैटेलाइट, नैविगेशन सैटेलाइट, वैदर सैटेलाइट और रिसर्च सैटेलाइट। स्पेस स्टेशन और ह्यूमन स्पेसक्राफ्ट भी एक तरह की सैटेलाइट हैं।
सैटेलाइट सर्विसेज

सैटेलाइट्स सर्विसेज की 3 कैटेगरी होती हैं-

1. फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विसेज- यह सभी देशों में वॉयस, डेटा और वीडियो ट्रांसमिशन करती हैं।
2. मोबाइल सैटेलाइट सर्विसेज- यह दूरदराज के क्षेत्रों, व्हिकल्स, शिप्स, लोगों और एअरक्राफ्ट को नेविगेशन सिस्टम के द्वारा कनेक्ट करती है।
3. साइंटिफिक रिसर्च सैटेलाइट सर्विसेज- यह लैंड सर्वे, मरीन साइंस, एट्मोस्फियर रिसर्च, अर्थ साइंस जैसी साइंटिफिक रिसर्च करने में मदद करती है।
सैटेलाइट्स के पाट्र्स

आर्टिफिशियल सैटेलाइट अलग-अलग डिजाइन और आकार की हो सकती हैं। सबमें दो पाट्र्स कॉमन होते हैं- एंटीना और पावर सोर्स। एंटीना पृथ्वी से सिग्नल्स भेजता और रिसीव करता है। सोलर पैनल सूरज की रोशनी को इलेक्ट्रिसिटी में बदलता है। नासा की कई सैटेलाइट्स में कैमरा व साइंटिफिक सेंसर भी लगे होते हैं।
फस्र्ट लॉन्च सैटेलाइट्स

कई सारे देशों ने सैटेलाइट का डिजाइन तैयार किया, पर वे उन्हें खुद लॉन्च करने में असफल रहे। पहली आर्टिफिशियल सैटेलाइट स्पूतनिक-1 थी, जो सोवियत यूनियन ने लॉन्च की। एक सोवियत स्पूतनिक प्रोग्राम शुरू किया गया, सरजोई कोरोलेव इसके चीफ डिजाइनर थे। यहां से सोवियत यूनियन और यूनाइटेड स्टेट के बीच स्पेस रेस शुरू हुई। ये पांच ऐसे देश हैं, जिन्होंने बिना किसी मदद के सबसे पहले सैटेलाइट लॉन्च की।
फस्र्ट लॉन्च कंट्री डेट ऑफ लॉन्चिंग सैटेलाइट
1. सोवियत यूनियन 4 अक्टूबर 1957 स्पूतनिक-1
2. यूनाइटेड स्टेट्स 1 फरवरी 1958 एक्सप्लोरर-1
3. फ्रांस 26 नवंबर 1965 एस्टेरिक्स
4. जापान 11 फरवरी 1970 ओजुमी
5. चीन 24 अप्रैल 1970 डोंगफेंग होंग-1

भारत 18 जुलाई 1980 को रोहिणी डी-1 अंतरिक्ष में भेजकर सैटेलाइट भेजने वाला सातवां देश बन गया।
सैटेलाइट पर अटैक

कई बार इन्फॉर्मेशन चुराने के लिए सैटेलाइट को हैक कर लिया जाता है। हालांकि यह बहुत मुश्किल होता है। जब सैटेलाइट को टेस्टिंग के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाता है, तब भी सैटेलाइट क्रैश हो सकती है।
क्यों जरूरी हैं सैटेलाइट्स

ञ्च जैसे एक चिडिय़ा आसमान से धरती को ज्यादा अच्छे से देख सकती है, उसी तरह ग्राउंड ऑब्जेक्ट की बजाय सैटेलाइट के जरिए डाटा ज्यादा अच्छी तरह से कलेक्ट किया जा सकता है।
ञ्च सैटेलाइट्स की सहायता से अंतरिक्ष को भी टेलिस्कोप से ज्यादा अच्छे ढंग से देखा जा सकता है, क्योंकि टेलिस्कोप से देखने पर धूल, बादल आदि भी सामने आते हैं।
ञ्च टीवी सिग्नल्स और फोन कॉल्स पहले ऊपर सैटेलाइट को भेजे जाते हैं, फिर सैटेलाइट्स उन्हें पृथ्वी पर अलग-अलग लोकेशन पर भेजती है।