दोस्तो, बसंत ऋतु ने दस्तक दे दी है। इस ऋतु में चारों ओर बहार छा जाती है। यह कविता भी ऐसा ही कुछ कह रही है न, 13 फरवरी को है बसंत पंचमी, तो आइए जानें कि क्या-क्या खास होता है इस दिन...
बसंत पंचमी मनाते हैं क्योंकि...
बसंत पंचमी के दिन लोग बसंत ऋतु का स्वागत करते हैं। माना जाता है कि इस दिन देवी सरस्वती का जन्म हुआ था। सरस्वतीजी का जन्म दिवस होने के कारण भी बसंत पंचमी का महत्व बढ़ जाता है। सरस्वतीजी ज्ञान और वाणी की देवी हैं, इसलिए यह दिन विद्यार्थियों के लिए खास महत्व रखता है। बसंत के आने से वातावरण में बहुत सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। एक ओर जहां ठंड गायब होने लगती है, वहीं दिन भी बड़े होने लगते हैं। बगीचे अलग-अलग रंगों के फूलों से भर जाते हैं। पृथ्वी का हर कोना मानो खिल उठता है।
विद्यारंभ संस्कार
हिन्दू संस्कृति में बसंत पंचमी के दिन से छोटे बच्चों के जीवन में शिक्षा की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण संस्कार है और इसे 'विद्यारंभ संस्कार कहा जाता है। इस दिन देशभर के स्कूलों में सरस्वतीजी की विशेष पूजा होती है। संगीत और कला क्षेत्र से जुड़े लोग भी सरस्वतीजी की पूजा और आराधना करते हैं।
पीले या केसरी पकवान
त्योहार की बात हो और पकवान की बात न हो, तो अधूरा-सा लगता है न! इस दिन कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, इनमें केसर हलवा, खीर, मीठा भात, बूंदी आदि प्रमुख हैं। इन व्यंजनों की खास बात यह है कि इनका रंग पीला या केसरी ही रखा जाता है।
अलग-अलग जश्न
जनवरी-फरवरी में गेहंू और उसके बाद सरसों की फसल पककर तैयार हो जाती है। इस खुशी को मनाने का यह सही समय होता है, इसलिए किसान खुश होकर जश्न मनाते हैं, वहीं नई ऋतु का स्वागत नॉर्थ इंडिया में पतंग उड़ाकर किया जाता है। यही नहीं, पंजाब और हरियाणा में तो पतंगबाजी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। इस दिन पीले या केसरिया रंग के कपड़े विशेष रूप से पहने जाते हैं।