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भगवान आपको कभी ऐसी हालत में नहीं डालते जहां वे आपकी मदद न कर पाएं

8 वर्ष पहले
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मैंने उन्हें पहली बार 2007 में दिव्य भास्कर कार रैली में अहमदाबाद में देखा। समीर कक्कड़ नाम है उनका। वे 1973 में पैदा हुए। यानी महज 40 साल की उम्र है। लेकिन भीड़ में वे सबसे अलग थे। एक साधारण सी चीज उन्हें दूसरों से अलग कर रही थी। वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सकते थे। फिर भी कार रैली में हिस्सा लेने आए थे। समीर के नाम कई रिकॉर्ड हैं। उन्हें ढेरों सम्मान मिल चुके हैं। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है। दुनिया में सबसे ऊंची कार रैली जीतने वाले के तौर पर वल्र्ड अमेजिंग रिकॉर्ड ने उन्हें सर्टिफिकेट भी दिया है। अब ऐसे किसी शख्स से मिलकर आपको नहीं लगता कि जिंदगी के प्रति किसी का भी नजरिया बदल सकता है? बिल्कुल बदल सकता है। समीर शारीरिक तौर पर 80 फीसदी अक्षम हैं। और ऐसे में यह सोचकर किसी को भी अचरज होगा कि वे अपनी स्पोर्ट्स कार के गियर कैसे बदलते हैं? एक्सेलरेटर कैसे दबाते हैं? ब्रेक कैसे लगाते हैं? इन सवालों के जवाब का आपको जब तक ओर-छोर भी नहीं सूझेगा, वे आपके सामने से फर्राटा भरते हुए निकल जाएंगे। चाहे मारुति मेगा ट्रीजर हंट हो या कच्छ डेजर्ट कार रैली। जम्मू-कश्मीर टायर मानसून राइड हो या लेह में होने वाली हिमालयन एडवेंचर रैली। राजस्थान में डेजर्ट स्टॉर्म रैली हो या नेपाल, भूटान और भारत में होने वाली ट्राई नेशन एस्केप रैली। हर जगह समीर अपनी मोडिफाइड कार के साथ मुस्कुराते हुए मिल जाएंगे। फिलहाल वे अपनी अगली कार रैली की तैयारी कर रहे हैं।
चूंकि समीर के दोनों पैर काम नहीं करते। इसलिए वे कार चलाने के लिए अपनी डिजाइन की हुई किट इस्तेमाल करते हैं। वे मैकेनिकल इंजीनियर हैं। इस तरह की रैलियों में हिस्सा लेने का उनका एक ही मकसद है कि शारीरिक रूप से अक्षम हर व्यक्ति गाड़ी चलाने के लायक हो। इसके लिए गाड़ियों में सुधार (मोडिफिकेशन) किए जाएं। और यह काम भी ज्यादा महंगा न हो। लोगों के बजट में हो जाए। समीर सिर्फ एक साल के थे। जब उन्हें बहुत तेज बुखार आया। इसने उनके शरीर का नीचे का हिस्सा बेकार कर दिया। लेकिन उनका जज्बे को नहीं तोड़ सका। उन्होंने पढ़ाई पूरी की। गुजरात यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री ली। प्रॉपर्टी का बिजनेस शुरू किया। उसमें भी सफलता के झंडे गाड़े। लेकिन समीर के लिए इतना काफी नहीं था। वे शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए मिसाल बनना चाहते थे। उन्होंने ऑटोमोबाइल किट डिजाइन की।
इसे किसी भी चार पहिया वाहन में आसानी से फिट किया जा सकता है। इसके जरिए इस तरह के लोग सहज ढंग से गाड़ी ड्राइव करने में सक्षम हो जाते हैं। समीर की बनाई यह किट अब तक 2,500 चार पहिया गाड़ियों में फिट की जा चुकी है। समीर ने एक संस्था भी बनाई है। इसका नाम है- साइका-एडिंग विंग्स टू द डिफरेंटली एबल्ड।’ इसी संस्था की पहल पर चार पहिया वाहनों में किट लगाई जा रही है। इस किट से गाड़ी फ्यूल एफिशिएंसी, माइलेज, इंश्योरेंस, तकनीक, या अन्य स्पेशिफिकेशन्स पर कोई फर्क नहीं पड़ता। इस किट की कीमत भी कम है। कार की साइज के आधार पर यह तय की जाती है। लेकिन खर्च 3,500 से 8,000 रुपए के बीच ही पड़ता है। इसे मारुति-800 से लेकर फरारी तक में लगाया जा सकता है। किट लगने के बाद गियर, एक्सेलरेटर, ब्रेक सब हाथ से ऑपरेट किए जा सकते हैं। समीर की खासियत ये है कि वे जरूरत के हिसाब से किट में भी मोडिफिकेशन कर देते हैं। कई लोग, जिनको कमर या जोड़ों की तकलीफ है, वे भी अपनी कारों में तब्दीली के लिए समीर से संपर्क कर रहे हैं। समय कैसे बदलता है? देखिए। समीर का परिवार पहले उन्हें गाड़ी नहीं चलाने देता था। तब उन्हें बहुत बुरा लगता था। लेकिन आजकल उनका पूरा परिवार उन्हीं की ड्राइविंग पर भरोसा करता है।
फंडा यह है कि..
भगवान आपको ऐसी हालत में कभी नहीं डालते, जहां वे आपकी मदद न कर सकें। वे आपको तकलीफ दे सकते हैं लेकिन वे यह भी ध्यान रखते हैं कि आप उनके सुरक्षा कवर से कभी दूर न होने पाएं।