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डाउनलोड करेंहर कंपनी अपने लिए बेस्ट वर्कफोर्स चाहती है और यह तभी संभव है जब हर एक कर्मचारी ठोक?बजाकर चुना जाए। हजारों की भीड़ में से यदि आप चुने जाएंगे तो उसकी पहली वजह है आपका रेज्यूमे। एक बेहतर रेज्यूमे आपको नौकरी के करीब पहुंचा सकता है। ऐसे में रेज्यूमे से जुड़े कुछ मिथक और सच सही रेज्यूमे तैयार करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
मिथक : रेज्यूमे आपके बारे में सब कुछ बताता है...
सच और समाधान - आपका रेज्यूमे शादी का बायोडेटा नहीं है। यदि प्रोफेशनल तरीके से इस मिथक का जवाब दें तो आपका रेज्यूमे एक नियोक्ता की जरूरतों का दस्तावेज मां है, जिसे समय-समय पर आपको सही जानकारियों से अपडेट करना होता है। जब भी रेज्यूमे बनाएं तो सोचें कि जब एक चयनकर्ता इसे पढ़ेगा तो उस पर क्या असर होगा। आपको लेकर उसके क्या सवाल और जिज्ञासाएं होंगी। कोई भी कंपनी मुख्य रूप से तीन कारणों से नए लोगों की भर्ती करती है-
1. अनुपयोगी कर्मचारियों को हटाकर नए उपयोगी व सक्षम लोगों को लाने के लिए।
2. नई जिम्मेदारियों को संभालने के लिए
3. किसी योग्य कर्मचारी के छोड़ने या उसके प्रमोशन पर। ऐसे में आप समझ लें कि आप किस ब्रैकेट में फिट होते हैं और वैसा ही रेज्यूमे बनाएं।
मिथक : कंपनी केवल उन्हें बुलाती है, जो लोग परिणाम दे सकते हैं
सच और समाधान - ऐसा नहीं है, कोई कंपनी किसी पोस्ट के लिए वेकेंसी निकालने से पहले यह तय नहीं कर सकती कि कौन अच्छा है और कौन खराब। नियोक्ता को आपकी उपयोगिता का सही पता इंटरव्यू के दौरान चलता है। अक्सर देखने में आता है कि बिस्किट की मार्केटिंग करने वाला, नई नौकरी में कार की मार्केटिंग कर रहा है। आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक करके निकला फ्रेशर, एक बड़ी कंपनी में बिजनेस एनालिटिक्स का काम कर रहा है। कहने का मतलब है कि खुद को सीमाओं में मत बांधिए। पहले से पूर्वाग्रह मत पालिए और ऐसा रेज्यूमे बनाइए जिससे आपको इंटरव्यू कॉल आए।
मिथक : नकल करने में क्या हर्ज है
सच और समाधान - बिल्कुल न करें, इंटरनेट पर हजारों रेज्यूमे के सैंपल मिलेंगे और आपके दोस्तों व परिचितों के रेज्यूमे सैंपल भी आपके पास होंगे तो इसका यह कतई मतलब नहीं कि आप भी वैसा ही तैयार कर लें। किसी सफल व्यक्ति के रेज्यूमे से आपको प्रेरणा लेनी चाहिए लेकिन अपना रेज्यूमे बनाने में नकल से ज्यादा अकल लगाना ही समझदारी होगी।
मिथक : एक बार कॉल आ जाए, बाकी सब संभाल लेंगे
सच और समाधान - हरगिज नहीं, यदि आपकी आदत ऐसी है तो संभल जाइए। रेज्यूमे आपकी ईमानदारी और विश्वसनीयता का दस्तावेज होता है। उसमें कुछ भी बढ़ा चढ़ाकर इंटरव्यू कॉल हासिल भी कर लिया तो आगे मुश्किल में फंस जाएंगे। यह डराने वाली बात नहीं बल्कि सैकड़ों प्रोफेशनल्स का अनुभव है कि आपने गलत लिखा और आगे उससे पल्ला झाड़ा तो समझ लीजिए आपको दरवाजा दिखा दिया जाएगा। रेज्यूमे को चुनावी घोषणा-पत्र की तरह न समझें। जो लिखें पूरे तथ्यों और विश्वास के साथ लिखें।
मिथक : सच लिखा तो पहले ही रिजेक्ट हो जाएंगे
सच और समाधान- बिल्कुल नहीं, आपको याद करना चाहिए थ्री ईडियट्स मूवी का वह सीन जिसमें राजू रस्तोगी नामक एक युवक इंटरव्यू दे रहा था। उसने अपने बारे में सब कुछ सही बताया और उसे उसका परिणाम भी मिला। रेज्यूमे में न उसने अपने माक्र्स छिपाए और न ही अपने दोष। हां, यह सच है कि आपके दोष या कमजोरियों का जिक्र करना रेज्यूमे में जरूरी नहीं, लेकिन यदि कोई तथ्य सच और झूठ के बीच लिखना जरूरी है तो सच के साथ जाएं। छिपाएंगे तो आपको इंटरव्यू में परेशानी हो सकती है।
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