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लर्निंग लीडरशिप का पहला सबक

7 वर्ष पहले
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पूरी जिम्मेदारी उठाएं- एपल कंपनी के स्टीव जॉब्स ने समय-समय पर लीडरशिप के सबक दिए जो जीवन में काम आ सकते हैं। उन्होंने एपल को ऐसा आयाम दिया है कि मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स के साथ कंपनियों के सीईओ भी इससे सबक लेते रहेंगे। जॉब्स के जीवन से लिए गए लीडरशिप के ये सबक सीरीका में प्रकाशित किए जा रहे हैं-

स्टीव जॉब्स जानते थे कि सिंपलिसिटी हासिल करने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और पेरिफेरल डिवाइसेस इस तरह से जोड़े जाएं कि वे एक ही डिवाइस जैसे बन जाएं। इसे एपल इकोसिस्टम के उदाहरण से समझिए। इसमें आइपॉड को आइट्यून सॉफ्टवेयर की मदद से मैक के साथ जोड़ा गया था।

इससे डिवाइस का इस्तेमाल करना और ज्यादा आसान हो गया। जॉब्स और एपल ने यूजर के अनुभव को डिवाइस में पिरोने की जिम्मेदारी ली थी। आइफोन में एआरएम माइक्रोप्रोसेसर के परफॉर्मेंस से लेकर एक एपल स्टोर में वही फोन खरीदने तक कस्टमर को होने वाले अनुभव का हर पहलू एक-दूसरे से जोड़ा गया था। एपल ने खुलापन रखा जिससे हार्डवेयर निर्माताओं के लिए एपल के ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करना संभव हुआ।

जॉब्स इस बात पर जोर देते थे कि पूरे डिवाइस की जिम्मेदारी खुद ली जाए। यह उनके व्यक्तित्व का असर था, जो बेहद कंट्रोलिंग था। लेकिन सटीक और नफासत भरे उत्पाद बनाने के उनके जुनून का भी इसमें हाथ था। जब भी वे एपल के शानदार सॉफ्टवेयर को किसी अन्य कंपनी के नीरस हार्डवेयर पर इस्तेमाल के बारे में सोचते भी थे तो उनकी हालत खराब हो जाती थी।

उनका यह भी मानना था कि ऐसे एप्स और कंटेंट जो एप्रूव नहीं हैं, वे एपल डिवाइस के परफेक्शन को खराब कर सकते हैं। यह ऐसा नजरिया था जिससे कम समय में होने वाले फायदे ज्यादा नहीं मिल पाते थे। कबाड़ जैसे डिवाइस, गलत मैसेज, और खींज पैदा करने वाले इंटरफेस से भरी दुनिया में यह नजरिया आनंददायक यूजर एक्सपीरियंस वाले अद्भुत उत्पादों की ओर ले जाता था। कभी कभी सनक की हद तक नियंत्रण रखने वाले के हाथों में रहना भी अच्छा होता है।

(स्रोत: हार्वर्ड बिजनेस रिव्यु)