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पढ़िए, इंजीनियरिंग के नए विषयों को, जिनमें हैं आपार संभावनाएं!

8 वर्ष पहले
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पसंदीदा कॅरिअर की सूची में अव्वल, इंजीनियरिंग की पारंपरिक स्ट्रीम्स बेशक स्टूडेंट्स को सालों से आकर्षित करती आई हैं। लेकिन अब स्पेशलाइजेशन के नए विकल्प न केवल कुछ अलग और चुनौतीपूर्ण करने का मौका दे रहे हैं, बल्कि जॉब मार्केट में भी आपके कदम मजबूत बनाने को तैयार हैं।
इंजीनियरिंग देश में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला कॅरिअर है। 150 साल पहले जहां देश के चार कॉलेजों में पढ़ाई के लिए कुछेक विषय उपलब्ध थे, वहीं आज 3,393 इंजीनियरिंग कॉलेजों में अप्रूव्ड कोर्सेज की संख्या 35 से अधिक है। अंडरग्रेजुएट लेवल पर बेशक इलेक्ट्रिकल, कम्प्यूटर, मैकेनिकल और आईटी छात्रों के बीच सालों से लोकप्रिय हैं, लेकिन अब कुछ नए स्पेशलाइजेशन के विकल्प न केवल कुछ अलग और चुनौतीपूर्ण करने का मौका दे रहे हैं, बल्कि जॉब मार्केट में भी आपके कदम मजबूत बनाने को तैयार हैं।
जीआईएस व रिमोटसेंसिंग--
क्यों जुड़ें
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले सालों में भारत का ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन मार्केट 10 बिलियन डॉलर का होगा। अब ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री इस क्षेत्र से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (नेचुरल रिसोर्सेज डेटा मैनेजमेंट सिस्टम - एनआरडीएमएस) के तहत भारत सरकार भी इस क्षेत्र में कई इनिशिएटिव ले रही है।
क्या है -
ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम्स व रिमोट सेंसिंग इंजीनियरिंग की अहम और नई शाखा हैं। रिसर्च व डिफेंस के अलावा रोजमर्रा की जिंदगी में इस विषय का इस्तेमाल गूगल अर्थ, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम्स, जिओ टैगिंग जैसी टेक्नोलॉजी के साथ हो रहा है।
कैसे पढ़ें
कई संस्थान जिओ इंफॉर्मेटिक्स में बीई और एमई करवाते हैं। इसके अलावा रिमोट सेंसिंग में भी मास्टर्स प्रोग्राम उपलब्ध हैं।
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